उज्जैन।
साल 2025 में दशहरा या विजयादशमी पर्व 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इस दिन देश भर में रावण का दहन किया जाएगा. रावण दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है. लेकिन बीते कुछ सालों से रावण दहन का विरोध देखने को मिल रहा है. इसे शिव भक्त और ब्राह्मणों का अपमान बताकर कुछ लोग विरोध जता रहे हैं. साल दर साल इस विरोध के सुर ऊंचे हो रहे हैं. इस साल युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन के विरोध में न्यायालय जाने की तैयारी कर ली है. युवा ब्राह्मण समाज संगठन के महामंत्री रूपेश मेहता का कहना है कि "रावण को उसके किए की सजा त्रेता युग में मिल चुकी है. बार-बार रावण दहन कर जाना चाहिए." महामंत्री रूपेश मेहता ने इंदौर की सोनम रघुवंशी का उदाहरण देते हुए कहा कि "जब सोनम के नाम में रघुवंशी लगा होने से शूर्पणखा के पुतले को जलाने से रोक दिया गया तो क्या न्यायालय ब्राह्मणों को न्याय नहीं देगा?" हम रावण के पुतले का दहन रोकने को लेकर 1 महीने पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संघ प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिख चुके हैं. न्यायालय से हमें न्याय मिलेगा पूर्ण विश्वास है.
काली मटकी फोड़ विरोध प्रदर्शन
रावण दहन के पूर्व युवा ब्राह्मण समाज संगठन ने काली मटकी फोड़कर विरोध करने की योजना बनाई है. रूपेश मेहता ने कहा,"इस साल जहां भी रावण दहन किया जाएगा. उन जगहों पर जाकर हम लोग रावण दहन कार्यक्रम के आयोजक के नाम पर काली मटकी फोड़कर प्रदर्शन करेंगे. साथ ही समाज को जागरूक करेंगे और भगवान से रावण दहन करवाने वाले आयोजकों को सद्बुद्धि देने की कामना करेंगे."