भोपाल। 
मप्र कांग्रेस में संगठन सृजन के बाद एकजुटता की कवायद पर एक के बाद एक बड़े नेता हमलावर हैं। ताजा मामला कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव का है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा है कि "पार्टी एवं पार्टी की विचारधारा के लिए वैचारिक और सतही संघर्ष आज समय की मांग है। सिर्फ भाषणों एवं बयानों से जहरीली विचारधाराओं से संघर्ष कर पाना नामुमकिन है।" उनकी यह पोस्ट ठीक तब सामने आई, जब राहुल गांधी मप्र आने वाले हैं। इस मामले में अरुण यादव से बात करने के लिए संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इधर, पार्टी की तरफ से भी कोई जवाब नहीं आया है।
चीफ और प्रभारी पर उठ चुके हैं सवाल
इससे पहले कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी पर सवाल उठाए थे कि इतनी गुटबाजी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा मप्र कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश पदाधिकारियों ने भी शिकायत की थी कि चौधरी उन्हें मिलने का समय नहीं दे रहे हैं। जबकि पूर्व जिलाध्यक्ष मोनू सक्सेना मप्र में संगठन सृजन कार्यक्रम में हुई धांधली को लेकर एआईसीसी के नेताओं से मिलकर शिकायत कर चुके हैं।
ब्लॉक अध्यक्षों का सिंगल नाम तय नहीं हो रहा
मप्र कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति का मामला लगातार अटका हुआ है। इस महीने की शुरुआत से शुरू की गई कवायद जारी है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के कारण सिंगल नाम तय नहीं हो पा रहा है। कई जिलाध्यक्षों ने बताया कि संगठन सृजन के तहत कहा गया है कि सिंगल नाम ही तय करके ऊपर भेजें। यदि बहुत अधिक विवाद होता है, तो प्रभारी के साथ मिलकर पैनल बनाना है। यह काम सभी जिलाध्यक्षों को 20 अक्टूबर तक करना है।
इसके बाद अगले दिन जिला कार्यकारिणी भी घोषित करनी है। मप्र में कांग्रेस संगठन के लगभग 1,000 ब्लॉक हैं। अभी 200 पर ही सिंगल नाम पर सहमति बन सकी है। मामले में प्रदेश पदाधिकारियों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि अक्टूबर तक पूरा काम कर लेंगे।