स्टूडेंट बनेंगे नेता, भाषण देंगे, वोट मांगेंगे... 9वीं से 12वीं के छात्र ठोकेंगे उम्मीदवारी, स्कूलों में बनेंगे 'सचिव-सरपंच'
भोपाल।
मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की 'मॉडल यूथ ग्राम सभा' योजना के तहत 110 विद्यालयों में छात्र पंचायतें बनाई जा रही हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भविष्य के नेता के रूप में तैयार करना है, जहां वे सरपंच, सचिव और ग्रामसभा सदस्य बनकर पंचायत की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे। यह शुरुआत प्रदेश के 55 जवाहर नवोदय और 55 एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूलों से हो रही है, जिसमें 9वीं से 12वीं तक के छात्र उम्मीदवारी कर सकेंगे और एक महीने तक चलने वाले चुनावी माहौल के बाद गुप्त मतदान प्रणाली से चुनाव होंगे। इस अनूठे प्रयोग का लक्ष्य ग्राम सभाओं में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना और छात्रों में तर्क, बहस तथा समस्या समाधान जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित करना है।
7 साल से नहीं हुए छात्रसंघ चुनाव
मध्य प्रदेश राज्य में पिछले सात वर्षों से छात्रसंघ चुनाव आयोजित नहीं किए गए हैं, जिससे छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सीधे तौर पर भाग लेने का अवसर नहीं मिल पा रहा था। इस पृष्ठभूमि में, अब विद्यालयों के भीतर भविष्य के नेताओं को तैयार करने की एक नई और महत्वपूर्ण पहल का सूत्रपात किया गया है। यह कदम छात्रों को नेतृत्व के गुणों से परिचित कराने और उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का अनुभव प्रदान करने की दिशा में उठाया गया है, जिससे वे समाज के सक्रिय और जागरूक सदस्य बन सकें।
110 स्कूलों में होगा छात्र पंचायतों का गठन
यह पहल केंद्र सरकार द्वारा संचालित 'मॉडल यूथ ग्राम सभा' नामक योजना के अंतर्गत की जा रही है। इस योजना के तहत, मध्य प्रदेश के कुल 110 विद्यालयों में छात्र पंचायतों का गठन किया जाएगा। इन छात्र पंचायतों का निर्माण एक संरचित तरीके से किया जाएगा, जिससे छात्रों को वास्तविक लोकतांत्रिक अनुभव मिल सके और वे जमीनी स्तर पर प्रशासन की समझ विकसित कर सकें।
नवोदय और एकलव्य स्कूल से शुरुआत
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की शुरुआत मध्य प्रदेश के 55 जवाहर नवोदय विद्यालयों और 55 एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूलों से की जा रही है। इन प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों को इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है, जहां छात्र पंचायतें सबसे पहले गठित होंगी। यह प्रारंभिक चरण इन विद्यालयों के छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर प्रदान करेगा और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करेगा।
9वीं से 12वीं के छात्रों की उम्मीदवारी
इस कार्यक्रम में 9वीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के छात्र उम्मीदवारी प्रस्तुत कर सकेंगे। इन छात्रों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन कर सकें और सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका को समझ सकें। चुनाव प्रक्रिया के दौरान लगभग एक महीने तक चुनावी माहौल बना रहेगा, जिसमें छात्र विभिन्न गतिविधियों में संलग्न होंगे और एक वास्तविक चुनाव का अनुभव प्राप्त करेंगे।
ऐसे होगा प्रचार
चुनाव प्रक्रिया के तहत, छात्र उम्मीदवार पोस्टर, भाषण और रैलियों जैसे पारंपरिक तरीकों का उपयोग करके अपना प्रचार करेंगे। यह उन्हें सार्वजनिक बोलने और अपने विचारों को व्यक्त करने का मंच प्रदान करेगा, साथ ही उन्हें जनसंपर्क के महत्व को भी समझाएगा। मतदान गुप्त मतदान प्रणाली के माध्यम से होगा, जिससे निष्पक्षता और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके। वोटों की गिनती के बाद, सरपंच और अन्य समिति सदस्यों का चयन किया जाएगा, जो छात्र पंचायत का नेतृत्व करेंगे और अपने साथियों के लिए कार्य करेंगे।
दूसरे राज्यों में भी चल रहीं ऐसी पहल
देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की पहलें मौजूद हैं, जो छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जोड़ने का प्रयास करती हैं। उदाहरण के लिए, झारखंड राज्य में 30,000 से अधिक विद्यालयों में बाल संसद का संचालन किया जा रहा है। यह छात्रों को एक मंच प्रदान करता है जहां वे अपने मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। राजस्थान और केरल जैसे राज्यों में भी बाल संसद और विद्यार्थी कैबिनेट जैसी संरचनाएं कार्यरत हैं। ये संरचनाएं छात्रों को विद्यालय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करती हैं। हालांकि, इन राज्यों में पूरी चुनावी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है, जिसमें प्रचार, गुप्त मतदान और मतगणना जैसे चरण शामिल हों। यह पहलू मध्य प्रदेश की इस नई पहल को विशिष्ट बनाता है, क्योंकि यह छात्रों को एक पूर्ण और वास्तविक चुनावी अनुभव प्रदान कर रहा है।

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