कोविड में जान गंवाने वाले कर्मचारी के परिवार को 5 साल बाद मिला न्याय, हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
जबलपुर।
कोरोना वायरस की पहली महामारी के दौरान जबलपुर कलेक्ट्रेट के एक कर्मचारी की नौकरी के दौरान जान चली गई थी. लेकिन कर्मचारी के परिवार को सरकार ने मुख्यमंत्री कोविड-19 कोरोना योद्धा योजना का लाभ नहीं दिया था. कर्मचारी की विधवा पत्नी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्याय के लिए गुहार लगाई थी. कोर्ट ने 90 दिनों के भीतर पीड़ित महिला को न्याय देने के लिए आदेश किया है.
राजीव कोरोना के दौरान ड्यूटी करते हुए बीमार हुए, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई
कोर्ट ने कहा, कोरोना वायरस की पहली और दूसरी लहर बहुत खतरनाक थी. उसमें लोगों की मृत्यु कैसे हो रही थी, इसकी सही वजह किसी के पास नहीं थी. यहां तक की डॉक्टर ने भी हाथ खड़े कर दिए थे. ऐसी स्थिति में यदि जान जोखिम में डालकर कोई कर्मचारी काम कर रहा था और उसकी वजह से उसकी जान भी चली गई ऐसी स्थिति में उसके परिवार को लाभ मिलना चाहिए.
जबलपुर के कलेक्ट्रेट में सहायक ग्रेड-3 पद पर राजीव उपाध्याय काम करते थे. कोरोना वायरस के पहले दौर में राजीव की ड्यूटी प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए बसें मुहैया करवाने और मरीजों को एंबुलेंस उपलब्ध करवाने के लिए लगाई गई थी. राजीव एक ड्यूटी के दौरान बीमार हुए, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई लेकिन डॉक्टर ने उनकी मृत्यु की वजह कोरोना वायरस ना मानकर हार्ट अटैक से होना बताया था.
कोरोना वायरस की महामारी के दौरान सरकार ने शुरू की थी मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना
कोरोना वायरस की महामारी के दौरान सरकार ने मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना शुरू की थी. राजीव उपाध्याय की पत्नी अंजू मूर्ति उपाध्याय ने इस योजना के तहत मिलने वाले लाभ के लिए आवेदन किया तो सरकार में यह कहते हुए इसका लाभ नहीं दिया कि आपके पति की मृत्यु कोरोना वायरस की वजह से नहीं हुई थी.
डॉक्टर ने कर्मचारी की मौत की वजह कोरोना वायरस ना मानकर हार्ट अटैक से होना बताया था
सरकार के जवाब से निराश होकर मंजू उपाध्याय मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंचीं. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट में जब यह मामला पहुंचा तो कोर्ट ने सरकार से मंजु उपाध्याय को लाभ न देने की वजह पूछी. सरकार की ओर जवाब में कहा गया कि सरकार ने 17 मार्च 2020 को जो परिपत्र जारी किया था उसमें मृतक कर्मचारी का कोरोना वायरस पॉजिटिव होना जरूरी था, तभी इस योजना का लाभ मिल सकता था.
जस्टिस विशाल मिश्रा ने सरकार को फटकार लगाते हुए आदेश दिया है कि कोरोना वायरस की महामारी के दौरान राजीव उपाध्याय की मृत्यु किसी भी वजह से हुई हो. उनकी पत्नी को इस योजना का लाभ देना ही होगा. कोर्ट ने अपने आदेश में सरकार को 90 दिन के भीतर मृतक की पत्नी को लाभ दिलाने का आदेश दिया है. इस योजना के तहत उनकी पत्नी को 50 लाख रुपये नगद मिलेंगे.

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