पूर्व मंत्री भूपेंद्र पर FIR क्यों नहीं? सागर SP, कलेक्टर, खुरई विधायक को SC का नोटिस:भूपेन्द्र सिंह के भतीजे के क्रेशर पर हाईटेंशन से कटा था बच्चे का हाथ, सरकार से भी मांगा जवाब
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने एक दर्दनाक हादसे में दोनों हाथ गंवाने वाले 14 वर्षीय बच्चे के मामले में मध्य प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है. अदालत ने इस मामले में बरती गई लापरवाही पर राज्य सरकार से चार हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा है. यह भी पूछा है कि मौजूदा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर क्यों न दर्ज की जाए.
खेलते समय हाइटेंशन लाइन से झुलसा बच्चा
सागर के बीना क्षेत्र के बरदा गांव में 1 जनवरी 2025 को 14 साल का मानस शुक्ला खेलते समय एक क्रशर के पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया था. याचिका के अनुसार, मानस खेलने की जगह के पीछे अवैध रूप से डंप किए गए पत्थरों के ढेर पर अपनी बॉल लेने के लिए चढ़ा था, लेकिन वहां से गुजर रहे बिजली के तारों के संपर्क में आकर बुरी तरह झुलस गया. उसके दोनों हाथ काटने पड़े और 70 फीसदी विकलांगता हो गई.
अवैध खनन से हादसा, विधायक के भतीजे पर आरोप
मानस के पिता की तरफ से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह हादसा अवैध खनन के कारण हुआ था. क्रशर से निकले पत्थरों का ढेर लाखन सिंह के कहने पर लगाया गया था. लाखन पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह का भतीजा है और अवैध रूप से खनन का काम करता है.
सबकी खबर को सुनाई थी मासूम मानस ने आपबीती
मानस शुक्ला ने कहा- मैं ग्राम बारदा का निवासी हूं। एक जनवरी की बात है। मेरे गांव से दो किलोमीटर दूर एक भागवत कथा चल रही थी। उस कथा की एक जनवरी को जल यात्रा में शामिल होने हम 5-6 दोस्त गए थे। हम वापस घर जा रहे थे। रास्ते में भूपेन्द्र सिंह, लखन सिंह की क्रेशर अवैध रूप से चल रही थी। उन्होंने अवैध रूप से गिट्टी का ढेर लगा रखा था। हम गांव वालों को उस ढेर के ऊपर से जाना पड़ता था। इस वजह से हम जब उस गांव से आ रहे थे तो मुझे रोड पार करने के लिए गिट्टी के ढेर पर चढ़ना पड़ा और उस ढेर के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन से मेरा हाथ टच हो गया। मैं वहीं बेहोश हो गया। मेरे साथ जो दोस्त थे वो पापा को बुलाकर लाए। मुझे बीना अस्पताल से सागर रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टरों ने कह दिया कि बच्चे का हाथ काटना पडे़गा। मेरे सिर, पैर से लेकर छाती तक करंट निकल गया। एम्स भोपाल में मेरा हाथ काटा गया। डॉक्टरों ने कहा यदि हाथ नहीं काटेंगे तो आगे जान का खतरा होगा। मानस ने कहा-पांच महीने हो चुके हैं। इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पूरा पुलिस विभाग उनसे मिला हुआ है। बीना थाने में दो महीने तक मेरी रिपोर्ट नहीं लिखी गई। मेरे पापा भूखे-प्यासे इधर-उधर घूमते रहे। घर के जेवर और जमीन गिरवी रखकर मेरा इलाज कराया गया। भूपेन्द्र सिंह और लखन सिंह पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई। वे अभी बीना के पास की खुरई से विधायक हैं। इसलिए उन्होंने दबाव डालकर हमारे खुरई के एक भैया अंशुल परिहार पर एफआईआर करा दी। उनपर दबाव डालने के लिए उनके पिता जी पर भी एफआईआर करा दी। मेरी भारत सरकार से यह मांग है कि हमें इंसाफ मिले और उनपर जल्द से कार्रवाई हो।
FIR का NHRC का आदेश भी नहीं माना
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लाखन सिंह और भूपेंद्र सिंह के खिलाफ FIR करने, पीड़ित को राहत देने और खनन कार्य बंद करने या रिहायशी इलाके से हटाने के निर्देश दिए थे. लेकिन आदेशों का पालन नहीं किया गया है. उलटे, याचिकाकर्ता को जान से मारने की धमकी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. उसके खिलाफ एक झूठा केस भी दर्ज कर दिया गया है.

दिल्ली में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर असम पुलिस का छापा, पासपोर्ट विवाद उभरा
हैदराबादी बिरयानी ने Heinrich Klaasen को किया बेहाल, पसीने छूटे