भोपाल। 
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर गुरुवार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव समेत अन्य दलों के नेता शामिल हुए। बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस सरकार को घेरा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ओबीसी आरक्षण को कांग्रेस की लड़ाई का नतीजा बताया। उन्होंने कहा देर आये, दुरुस्त आये। सरकार ने अपनी गलती मानी और अब सुधारने का प्रयास कर रही है। यह लड़ाई कांग्रेस पार्टी ने लड़ी है, और यह हमारी जीत है। सिंघार ने कहा, की खोदा पहाड़ निकली चुहिया। सरकार कांग्रेस के बनाए घर में नारियल फोड़कर श्रेय लेना चाहती है। वहीं पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि हम इसका स्वागत करते हैं लेकिन 6 साल तक सरकार को गुमराह करने वाले अधिकारी और वकीलों पर कार्रवाई होनी चाहिए। ओबीसी आरक्षण का केस लड़ने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए वकील को दिए है।
आरक्षण का रास्ता जल्द से जल्द साफ हो
सिंघार ने जोर देकर कहा कि किसी के हित की बात हो, तो राजनीति नहीं करनी चाहिए। सिंघार ने मांग की कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का रास्ता जल्द से जल्द साफ होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने पहले से ही 27 फीसदी आरक्षण देने का मन बना लिया था, लेकिन कई पेचीदगियां सामने रखीं। इसके जवाब में कांग्रेस नेताओं ने सुझाव दिया कि इस मामले को विधानसभा में लाकर लोकसभा में प्रस्ताव भेजा जाए, ताकि आरक्षण का लाभ ओबीसी वर्ग को शीघ्र मिल सके। सिंघार ने यह भी कहा कि पिछले छह साल से यह मामला कोर्ट में अटका हुआ है, और अब समय आ गया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इस मुद्दे को तुरंत हल करे।
ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी अड़चनों पर चर्चा
जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसमें ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी अड़चनों पर चर्चा हुई। अगर ओबीसी आरक्षण को शीघ्र लागू करने का रास्ता निकलता है तो यह सकारात्मक कदम होगा। सर्वदलीय बैठक में यही नीति बनी कि कानून को लागू किया जाए और जिन लोगों ने 6 वर्ष तक इसे रोके रखा, उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो। यह सर्वसम्मति से सोचा गया कि आरक्षण लागू होना चाहिए, जो स्वागतयोग्य है।