यह हमारा स्वर्णिम प्रदेश हैं जहां जनप्रतिनिधि और अधिकारी सड़कों पर नूराकुश्ती खेल रहे हैं....दांत पीसे... मुक्का बांधा... और कहा तु मुझे जानता नहीं ह़ै...
भोपाल, सबकी खबर।
बुधवार का दिन चंबल के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक नजरिए से बड़ा ही चौंकाने वाला और गहमागहमी भरा रहा है। जहां एक विधायक ने कलेक्टर को मारने के लिए सीधा हाथ ही उठा लिया। भिंड विधायक नरेंद्र कुशवााह और भिण्ड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव की घटना आज पूरा प्रदेश जान चुका हैं किस तरह एक राजनेता सीधे एक जिले के सबसे बड़े ओहदे पर बैठे कलेक्टर पर हमला करने की कोशिश कर रहा है। इन सबके बीच 24 घंटे बीतने के बावजूद एक संगठन जो अपने अधिकारियों की सुरक्षा का जिम्मा लेता हैं वह संगठन आईएएस एसोसिएशन 24 घंटे बाद भी चुप्पी साध बैठा है। यह बड़ा ही चिंतनीय प्रश्न है। विधायक सीधे अधिकारी के घर के सामने तंबू ठोंककर बैठ गए समर्थकों से चोर चोर का नारा भी लगवा दिया। समर्थक भी नेताजी के साथ जोश में दिखे। लेकिन उसके बाद कलेक्टरों की जमात मतलब अधिकारियों का आईएएस एसोसिएशन चुप बैठा है। बुधवार को जो प्रदेश में हुआ वो बड़ा ही शर्मनाक हैं। विधायक तो प्रभारी मंत्री से बात करने पर तंबू उठाकर चल भी दिए। लेकिन जो सवाल वह प्रशासनिक और राजनीतिक विथिका पर खड़े कर गए वह बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। इस मामले के दो मजेदार पहलू भी हैं एक पहलू यह है कि इतना बड़ा कांड हो गया और जब हो रहा था कि तब जिले के पुलिस कप्तान असित यादव कहीं भी नजर नहीं आए। न उनका कोई बयान इस संदर्भ में आया दबी जुबान से लोगों की चर्चा यह भी थी कि एसपी और कलेक्टर में बनती ही नहीं है। इस विवाद की उपज खाद भले ही रही हो लेकिन अंदरखाने से जो खबरें छनकर सामने आ रही थी वह यह है कि एक आरआई को खनिज का प्रभार दिए जाने से विधायक नाराज थे उनकी नाराजगी पूरे प्रदेश ही नहीं अपितू पूरे देश ने देख ली। यहां आपको बताते चलें कि कलेक्टर साहब भी कुछ कम नही है। विवादों से इनका भी चोली दामन का साथ रहा है। अभी हाल ही में परीक्षा केंद्र पर एक छात्र की पिटाई करने के मामले में काफी सूर्खियां बटोर चुूके थे साहब। कुछ महीने पहले एक मासूम की मौत पर भी बड़ा ही बेतूका बयान कलेक्टर साहब ने दिया था। उनकी की होड़ में यहां के एसपी साहब हैं जिन्होंने तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को ही कुचलने का कुत्सित प्रयास किया था। वह मामला तो सीधे हाईकोर्ट तक गया था। बहरहाल सूबे में राजनेताओं का एक बुरा दौर चल रहा हैं गलत बयानबाजी हो या उलटी सीधी हरकतें यह सब सवालों के घेरे में है।

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