इंदौर में बोले सीएम मोहन यादव- 'अंग्रेजों के पुराने कानून खत्म, फास्ट ट्रैक कोर्ट से मिल रहा त्वरित न्याय'
इंदौर।
ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शनिवार को वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस 'Enhancing Access to Justice' का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुरूप उपलब्ध सभी संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के लिए सरल, सुलभ और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, सुप्रीम कोर्ट एवं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों सहित बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
'पंच परमेश्वर' की परंपरा से जुड़ी है भारत में न्याय की अवधारणा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारत में न्याय की अवधारणा कोई नई व्यवस्था नहीं है। हमारी परंपरा में 'पंच परमेश्वर' के माध्यम से विवादों का समाधान समझाइश, संवाद और आपसी सहमति से किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में संवाद और समाधान की यह परंपरा आज भी प्रासंगिक है।
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में अंग्रेजों के दौर के कई गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त किया गया है। जनविश्वास अधिनियम, ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और डिजिटल डेटा संग्रह जैसी व्यवस्थाओं ने न्याय प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक हितैषी बनाने में मदद की है।
पेपर लीक और धोखाधड़ी के मामलों में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट
मुख्यमंत्री ने युवाओं के भविष्य से जुड़े पेपर लीक और धोखाधड़ी के मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में 24 घंटे के भीतर चार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले मामलों में तेजी से न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।
UCC को लेकर भी सीएम ने रखी बात
डॉ. मोहन यादव ने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित विधेयक विधानसभा में पारित किया गया है। उन्होंने इसे सर्वधर्म सद्भाव और समानता को मजबूती देने वाला कदम बताया। मुख्यमंत्री ने मालवा की धरती पर न्याय की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए सम्राट विक्रमादित्य और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के निष्पक्ष न्याय के उदाहरणों को भी याद किया।

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