आयुष्मान के नाम पर लूट! भोपाल के निजी अस्पतालों में फर्जी इलाज, फर्जी भुगतान का बड़ा आरोप, RTI एक्टिविस्ट का दावा
भोपाल।
आरटीआई एक्टिविस्ट नीरज यादव ने राजधानी भोपाल के कई निजी अस्पतालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्टिविस्ट का दावा है कि अस्पतालों ने फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर अपना रजिस्ट्रेशन कराया और आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के नाम पर फर्जी भुगतान निकाले।आरोपों के अनुसार, जिन बीमारियों का इलाज एक–दो दिन में संभव था, उन मरीजों को जानबूझकर एक सप्ताह तक भर्ती दिखाया गया, ताकि शासन को आर्थिक नुकसान पहुँचाया जा सके।
यादव ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पोर्टल से डॉक्टरों की सूची निकाली, तो उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में अधिकारियों के साथ मिलकर उस सूची को पोर्टल से हटा दिया, ताकि यह पता न चल सके कि कौन-सा डॉक्टर कहां-कहां कार्यरत बताया गया है। जानकारी को जानबूझकर छुपाने का प्रयास किया जा रहा है।
यादव ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पतालों ने रजिस्ट्रेशन के दौरान जिन डॉक्टरों के नाम दर्शाए, वे डॉक्टर एक ही समय में 8 से 10 अस्पतालों में कार्यरत बताए गए। जब संबंधित डॉक्टरों से बातचीत की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी अस्पताल में नियमित रूप से कार्यरत नहीं हैं, बल्कि उनकी जानकारी के बिना उनके नामों का दुरुपयोग किया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई अस्पतालों में नॉन-मेडिकल स्टाफ से इलाज कराकर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया गया। यादव का कहना है कि जैसे ही उन्होंने इस पूरे मामले को मीडिया के सामने रखा और स्वास्थ्य विभाग,मंत्री एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की, उसी दिन से उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। आरोप है कि उन्हें सत्ता और शासन से जुड़े विभिन्न माध्यमों से डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। एक्टिविस्ट ने कहा कि वे किसी भी दबाव में नहीं आएंगे और सभी दस्तावेज़ों के साथ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

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