योग को कर्म के कौशल से जोड़िए

23 June 2017

एक समय हमारे देश, और देश ही क्यों, दुनिया भर में व्यक्ति का बल ही उसकी सर्वोच्चता के निर्धारण में निर्णायक हुआ करता था। पुराने युद्धों के सिलसिले में वीरों के जिस पराक्रम कां खास उल्लेख किया जाता है, तब भी बल आधारित श्रेष्ठता का ही परिचायक था लेकिन आगे…

योग का तमाशा

22 June 2017

योग को तो हम भारतीय युगों से देखते आ रहे हैं, अब योग का तमाशा भी देख रहे हैं। वैसे ही जैसे गांधी जयंती को अहिंसा दिवस के रूप में, अक्षय तृतीया को सोना खरीदने के लिए या धनतेरस के पहले पुष्य नक्षत्र मनाने के तमाशे देख रहे हैं। ऐसा…

ट्रम्प क्यूबा और साम्राज्यवाद का पुनरागमन

21 June 2017

अपने प्रचार के समय से ही राष्ट्रपति ट्रम्प कास्त्रो विरोधी रहे हैं। यह विडम्बना ही है कि अपने लोगों का विश्वास और वोट प्राप्त करने के लिए उन्होंने वही विचारधारा और तर्क अपनाए जिनको कास्त्रो ने अपने जीवन में यहां अमेरिका के संबंधों में अपनाया था। जिनका नाम इस प्रकार…

कर्ज एवं आत्महत्या से मुक्ति हेतु सामुदायिक कृषि

20 June 2017

औद्योगिक विकसित देश जापान के लिए किसानों की उपज को उच्च मूल्य पर खरीदना आसान है क्योंकि वहां की जीडीपी में योगदान 2 प्रतिशत से भी कम है। प्रति व्यक्ति 1700 डॉलर जीडीपी वाले भारत के लिए जापान का कृषि उपज मूल्य मॉडल अपनाना संभव नहीं है। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों…

प्रश्न पूछना भी देशप्रेम है

19 June 2017

दया, धर्म, करुणा, उदारता और ऐसे अनेक मानवीय गुणों की माला जपने वाला भारतीय समाज कब और कैसे इतना हिंसक हो गया कि अपने स्वार्थ के लिए किसी निर्दोष की जान लेने से भी न झिझके, यह गहरी चिंता का विषय है। संकीर्णता, स्वार्थ, बेईमानी, कपट ये सब भी मानवीय…

कृषि क्यों मांग रही बलिदान

17 June 2017

यह बात समझ से परे है कि मंदसौर में हुई हिंसा के अगले ही दिन किसानों की मांगों को न्यायोचित क्यों और कैसे मान लिया गया। क्या यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी नहीं है? नर्मदा घाटी के किसान सरदार सरोवर बांध की अवैध डूब के खिलाफ पिछले 32…

जनसम्पर्क की नई आवाज

17 June 2017

यह आम धारणा है और लगभग सही भी है कि सरकारी विभागांे में दलाली, कमीषनखोरी और भ्रष्टाचार इतनी गहरी पैठ कर गया है कि आम लोगों ने उसे नियति मानकर आत्मसात कर लिया है। लेकिन स्थिति तब विचित्र हो जाती है जब कोई कर्मठ और ईमानदार अफसर व्यवस्था की न…

क्यों मिले अवमानना के खिलाफ दंड का न्यायिक अधिकार?

16 June 2017

अभी तक इन संवैधानिक संस्थानों की ओर से चुनाव आयोग जैसी कोई मांग भी नहीं उठी है। लेकिन सवाल है कि इन संस्थाओं के पास अवमानना के लिए दण्डात्मक अधिकार हों और वे उनका प्रयोग करें तो इससे उनका अवमूल्यन तो नहीं होगा? न्याय के स्वाभाविक सिद्धान्तों में कोई भी…

बिल्ली हज पर कहां जाती है?

15 June 2017

इंसानी फितरत है, अपनी बुराइयों को दर्शाने के लिए वह खुद की जगह दूसरों का उदाहरण पेश करता है, खासकर जानवरों का। जैसे बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद, लोमड़ी ने कहा अंगूर खट्टे हैं, धोबी का कुत्ता घर का न घाट का या सौ-सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को…

किसान विस्फोट के मायने

14 June 2017

याद रहे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख में, सुप्रीम कोर्ट में उसके हलफनामे के बाद से औपचारिक रूप से भी कोई बदलाव नहीं आया है, फिर व्यवहार में बदलाव का तो सवाल ही कहां उठता है। और जहां तक किसानों की कर्ज माफी का…

अब देश भी बिकेगा, आप बेखबर रहेंगे

13 June 2017

गनीमत है कि माउंट एवरेस्ट भारत में नहीं है, अन्यथा न जाने कब चुपके से उसे निजी संपत्ति घोषित कर दिया जाता और संसार के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचने का आम आदमी का सपना ध्वस्त हो जाता। 27 मंजिला घर में निवास करने वाले पूंजीपतियों को यह गवारा ही…

'प्रश्न प्रदेश’ में खुद को दोहरा रहा इतिहास!

13 June 2017

प्रदेश को जिस सवाल का तुरंत जवाब चाहिए, वह दरअसल यह है कि विधानसभा चुनाव में धर्म व जाति की दीवारें ढहाकर जीत हासिल करने के दावे के बाद ऐसा क्या हो गया कि भाजपा के प्रदेश की सत्ता संभालते ही वे दीवारें और मजबूत दिखने लगीं और मामला जातियुद्ध…

मध्यप्रदेश का किसान आंदोलन

12 June 2017

1956 में अपने निर्माण के बाद मध्यप्रदेश ने उतनी हिंसा कभी नहीं देखी, जितना वह आज देख रहा है। पिछले एक सप्ताह से मध्य प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा जल रहा है। दर्जनों बसों और ट्रकों को आंदोलनकारियों ने फूं क डाला। कारों और पेट्रोल पंपों में भी आग लगाई…

भाजपा, उसकी सरकारें, कर्जमाफी और किसान आन्दोलन

10 June 2017

उत्तरप्रदेश विधानसभा के गत चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसानों से किया गया कर्जमाफी का वायदा अब लगभग सारे देश में उनकी सरकार व पार्टी के गले की फांस बन गया है। इससे पहले भी उप्र के नये-नवेले मुख्यमंत्री की मंत्रिपरिषद की 15 दिनों तक इस डर से कोई…

कतर को बिरादरी बाहर करने के मायने

09 June 2017

1991 के बाद खाड़ी क्षेत्र में एकबार फिर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। तब खाड़ी युद्ध छिड़ा था, अब खाड़ी मनमुटाव सामने है। सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन, यमन, लीबिया और संयुक्त अरब अमीरात ने कतर के साथ अपने राजनयिक संबंध तोड़ दिए हैं। इन देशों ने आरोप लगाया है…

बहुत हुआ किसानों पर अत्याचार....केवल जुमला था

08 June 2017

मध्यप्रदेश पिछले पाँच सालों से कृषि क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार कृषि कर्मण अवार्ड जीतता आ रहा है। यहां की कृषि विकास दर लगभग 25 प्रतिशत है, जो देश में सबसे अधिक है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं को किसान का बेटा बताते हैं और कृषि को लाभकारी कार्य बताते…

हमारे शहर विकास की ओर अग्रसर

07 June 2017

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को वादा किया था कि यदि वे सत्ता में आए तो वे उन्हें लागत से ऊपर 50 फीसदी मुनाफा दिलवाएंगे। उनके इस वादे के बाद किसानों ने उन्हें जोरदार बहुमत से जीत दिलाई लेकिन, अब वे अपने उस वादे की चर्चा नहीं करते। एनडीए सरकार…

जलवायु: खतरे से भरा भविष्य

06 June 2017

अंतरराष्ट्रीय प्रशासन समझौतों और रियायतों का एक जटील कार्य है। पर्यावरण के मुद्दे शामिल हो जाने की स्थिति में यह और खास हो जाता है। यह एक स्वीकार्य तथ्य है कि पर्यावरण की गुणवत्ता प्रत्येक दिन गिरती जा रही है। मरुस्थलीकरण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी, ग्लोबल वार्मिंग ऐसे…

वर्ल्ड हैज़ फॉलन

05 June 2017

पिछले साल निर्देशक बबाक नजाफी ने ओलम्पस हैज़ फॉलन की अगली कड़ी लंदन हैज़ फॉलन दर्शकों के लिए प्रस्तुत की थी। इस फिल्म में भी वही एक्शन और रोमांच था जो ओलम्पस में था। फर्क इतना ही है कि पहली फिल्म में अमरीकी राष्ट्रपति अमरीका में ही निशाने पर होते…

ये दिल मांगे मोर !

03 June 2017

जाते-जाते जज महेशचंद्र शर्मा ने बहस का अच्छा विषय दे दिया है। जीव विज्ञानी इस जवाब को ढूंढने में लग गये हैं कि मोर का प्रजनन आंसू से होता है, अथवा यौन क्रिया से। शास्त्रों की मीमांसा करने वाले, मोर के धार्मिक महातम के अन्वेषण में लग गये। साहित्यकार और…

अयोध्या विवाद अब भाजपा के गले की फांस

02 June 2017

अयोध्या का रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है और संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों के विवाद की जगहों से दूर रहने की परम्परा रही है। इसीलिए 1983 में राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह अयोध्या आये और राम जन्मस्थान देखने की इच्छा जताई तो फैजाबाद जिला प्रशासन ने उन्हें कनक…

मोदी सरकार के तीन साल

01 June 2017

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के तीन साल 26 मई को पूरे हो गए। अब दो साल का समय बाकी है। जैसा कि ज्ञात है लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत है, इसके बावजूद पार्टी ने चुनाव पूर्व किए गठबंधन को जारी रखा तथा…

मवेशियों की रक्षा बनाम इंसान

31 May 2017

पूर्वोत्तर प्रदेश मेघालय में भाजपा के तूरा जिला अध्यक्ष बर्नार्ड एन. मरक ने एक बयान में कहा कि मेघालय में भाजपा के अधिकतर नेता गोमांस खाते हैं। मेघालय जैसे राज्य और ख़ासकर गारो हिल्स में गोमांस पर प्रतिबंध लगाने का सवाल ही नहीं उठता। भाजपा अगर राज्य में अगले वर्ष…

पूर्वोत्तर में विकास का सेतु

27 May 2017

केंद्र की सत्ता में आने की अपनी तीसरी वर्षगांठ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी उत्सव में नहीं, बल्कि असम में एक पुल का उद्घाटन करते हुए मनाई। यह वो पुल है, जो असम को अरुणाचल प्रदेश से जोड़ेगा। इसे भारत का सबसे बड़ा पुल बताया गया है। प्रधानमंत्री ने स्वयं…

आसान निवेश की खातिर

26 May 2017

केंद्र की सत्ता में नरेंद्र मोदी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया कि इस अवधि में मोदी सरकार ने विकास और जन-कल्याण के लिए उतने कार्य किए, जितने पिछले सत्तर साल में नहीं हुए। शाह ने कहा कि…

जातीय हिंसा की आग

25 May 2017

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुन: भड़की जातीय हिंसा निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली है। इस हिंसा में दलित समुदाय के एक व्यक्ति की मौत हो गई। मंगलवार को बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने तनावग्रस्त गांव शब्बीरपुर गांव का दौरा किया। आते-जाते रास्ते में भी कुछ जगहों पर…

साहस का सम्मान

24 May 2017

मेजर नितिन लिथुल गोगोई ने प्रतिकूल परिस्थितियों में बुद्धि और साहस का परिचय दिया। तो उचित ही है कि भारतीय सेना ने उनका सम्मान किया है। इस सम्मान का संदेश दूरगामी है। इससे अलगाववाद और आंतरिक अशांति से निपटने के लिए तैनात सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ेगा। दूसरी तरफ अशांति…

नमक की तरह सत्य, सत्ता के स्वादानुसार

22 May 2017

अकबर इलाहाबादी ने राह सुझाई थी कि तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो। शब्दों की ताकत का अहसास इतनी खूबसूरती से शायद ही किसी ने कराया हो। इस ताकत के बूते ही गुलाम भारत में पत्रकारों ने अंग्रेजों को दर्जनों बार आईना दिखाया। आर्थिक, सामाजिक और औपनिवेशिक हुक्मरानों के तमाम…

आम हित में जीएसटी

21 May 2017

किसी नई चीज की तरह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर भी देशभर के अलग-अलग हल्कों में कई प्रकार की आशंकाएं आरंभ में मौजूद थीं। लेकिन जैसे-जैसे इसकी तस्वीर साफ हुई है, न सिर्फ अंदेशों का निवारण हुआ है, बल्कि इस नई परोक्ष कर व्यवस्था से आम जिंदगी के…

हेग में जीत पर मोदी का मंगलगान !

20 May 2017

गुरुवार को अचानक से गुरुघंटाल चैनलों ने पैंतरा बदला। हेग में पाकिस्तान के पराभव को मोदी के पराक्रम से जोड़ने की जबरदस्त प्रतिस्पर्धा शुरू हुई। अंग्रेज़ी के एक चिल्ला-चिल्ली चैनल की हिडिंबानुमा एंकरनी ने बड़ा सा मुंह खोला- ‘लीगल मिसाइल ऑफ मोदी अगेंस्ट पाकिस्तान!’अपने देश में वीर रस के कवियों…