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इंदौर में Driving License बनवाना सबसे कठिन

By Sabkikhabar :15-04-2019 08:58


इंदौर आरटीओ में हाईटेक ट्रायल ट्रैक पर कैमरों के बीच होने वाले ट्रायल से इंदौर में लाइसेंस बनवाना सबसे कठिन है। आरटीओ ने जब इंदौर के पिछले पांच साल के आंकड़ों की रिपोर्ट मुख्यालय भेजी तो उसमें खुलासा हुआ कि पिछले पांच सालों की तुलना में इंदौर आरटीओ में लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या में कमी आई है। हालांकि फ्री होने के बाद भी महिलाओं की संख्या में भी पहले की तुलना में कमी आ गई है।

करीब तीन साल पहले इंदौर आरटीओ को नायता मुंडला स्थित नए भवन में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद भटिंडा की तर्ज पर 3 फरवरी 2017 को हाईटेक ट्रायल ट्रैक की शुरुआत की गई थी। अब इसी के बाद से यहां पर लाइसेंस में होने वाली गड़बड़ी पूरी तरह से समाप्त हो गई। जरा सी गलती पर ट्रैक पर लगे कैमरे और सेंसर से आवेदक फेल हो जाता है। वहीं कोई दूसरा व्यक्ति ट्रायल नहीं दे दे इसलिए डेश बोर्ड पर इन्फ्रारेड कैमरे भी लगाए गए हैं। इसी के साथ अब यहां पर लाइसेंस बनने में कमी आई है। अधिकारी बताते हैं कि ट्रायल देने वाले हर 10 में से 2 व्यक्ति फेल हो जाते हैं। पहले यह संख्या कम थी। वहीं कुछ लोग तो डर से पक्के लाइसेंस का ट्रायल देने ही नहीं आते हैं।

संभागीय परिवहन उपायुक्त संजय सोनी ने बताया कि हम लोग हर साल वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर एक रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय भेजते हैं। इस साल की वर्ष 2018-19 में इंदौर में कुल 38723 लाइसेंस बने हैं। जबकि 2017-2018 में यह आंकड़ा 29556 का था। पूर्व के सालों की तुलना करे तो अभी का आंकड़ा कम है, लेकिन अब हम दावें से कहते हैं कि जो व्यक्ति गाड़ी चलाना जानता है, उसे ही लाइसेंस मिल रहा है। इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछली शिवराज सरकार ने महिलाओं के लाइसेंस को निशुल्क कर दिया था, लेकिन अब भी महिलाओं के लाइसेंस में कमी आ गई है। पिछले पांच वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा किसी भी वर्ष 10 हजार के नजदीक नहीं जा पाया है। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में तो यह आंकड़ा 7847 पर ही ठहर गया है। जबकि विभाग ने कॉलेजों में जाकर कैम्प भी लगाए हैं। महिलाएं ट्रायल ट्रैक के डर के कारण पक्के लाइसेंस बनवाने ही नहीं आती है।
 

Source:Agency