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वित्त मंत्री का दर्जा रिजर्व बैंक के गवर्नर से बड़ा : मनमोहन सिंह

By Sabkikhabar :08-11-2018 07:52


नई दिल्ली। पूर्व पीएम व पूर्व आरबीआई गवर्नर डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार देश के वित्त मंत्री का दर्जा रिजर्व बैंक के गवर्नर से बड़ा है। कोई गवर्नर पद पर रहते हुए तभी सरकार से तनातनी कर सकता है, जब वह नौकरी छोड़ने को तैयार हो। डॉ.मनमोहन सिंह की यह राय वित्त मंत्री अरुण जेटली व मौजूदा गवर्नर उर्जित पटेल के बीच जारी कथित खींचतान के बीच सामने आई है। यह कांग्रेस की नीति के खिलाफ और सरकार के पक्ष में प्रतीत होती है।


इसके पहले देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की तत्कालीन आरबीआई गवर्नर को लिखे पत्र से भी मोदी सरकार का पक्ष मजबूत हो चुका है। हालांकि डॉ. मनमोहन सिंह ने सार्वजनिक तौर पर अपनी राय नहीं जताई है, बल्कि उन्होंने अपनी बेटी दमन सिंह की किताब 'स्टि्रक्टली पर्सनल : मनमोहन गुरशरण' में कहा था कि वित्त मंत्री का दर्जा हमेशा ही रिजर्व बैंक के गवर्नर से बड़ा होता है। उनका मानना है कि गवर्नर सरकार के सामने तभी अड़ सकता है, जब वह नौकरी छोड़ने का मन बना ले। यह किताब पहली बार 2014 में प्रकाशित हुई थी। अभी प्रसंगवश चर्चा में आई है।

'गिव एंड टेक' का रिश्ता डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि गवर्नर का पद हमेशा 'गिव एंड टेक' के रिश्ते वाला होता है। मुझे कोई भी फैसला लेने से पहले सरकार को विश्वास में लेना होता था। रिजर्व बैंक का गर्वनर वित्त मंत्री से ऊपर नहीं हो सकता है। वित्त मंत्री के आदेश को रिजर्व बैंक का गर्वनर टाल नहीं सकता। यदि गर्वनर का मन नौकरी गंवाने का हो, तो वह ऐसा कर सकता है।'

इंदिरा सरकार से हुआ था टकराव
किताब में मनमोहन सिंह के हवाले से कहा गया है कि 1983 में इंदिरा गांधी की सरकार के वक्त वह रिजर्व बैंक गवर्नर थे और उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। इसमें कहा गया है कि बैंकों को लाइसेंस देने के मामले में रिजर्व बैंक की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका से सिंह ने एक बार गवर्नर के पद से इस्तीफा देने का भी सोचा था। इंदिरा सरकार से हुई उनकी अनबन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के साथ मेरा टकराव हो गया था। आखिरकार सरकार ने आरबीआई को निर्देश दिया और टकराव खत्म हो गया।
 

Source:Agency