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Date 12-12-18

हर बच्चे को है अधिकार, मिले ’प्यार भरे स्पर्श की देखभाल ’- विक्स

By Sabkikhabar :12-10-2018 06:46


विक्स ने अपने कैम्पेन के दूसरे चरण में प्रस्तुत की प्रेरणा देने वाली एक और सच्ची कहानी। जानिए निशा, एक दुर्लभ जेनेटिक स्किन कंडीशन- इक्थियोसिस से पीड़ित छोटी सी बच्ची और ’टच ऑफ केयर’  के जादू से बदली उसकी जिंदगी की कहानी के बारे में
 
मुंबई: . विक्स, एक ऐसा ब्रांड जो परिवार और प्यार भरी देखभाल की पहचान है, ने हाल ही में अपने दिलों को छूने वाले विक्स रुटचऑफकेयर अभियान के दूसरे चरण को लॉन्च किया। इस अभियान ने पिछले वर्ष लोगों को बड़ी संख्या में प्रेरणा देने और जोड़ने का काम किया है। विक्स-वन इन अ मिलियन ’ एक बार फिर एक प्रेरणादाई कहानी लेकर आया है, इस बार यह कहानी है एक बच्ची निशा की जो इक्थियोसिस नामक एक जेनेटिक स्किन कंडीशन का शिकार है. निशा को उसे दत्तक स्वरूप् अपनाने वाले माता-पिता अलोमा और डेविड लोबो से मिलने वाली देखभाल और स्नेह के परिणाम स्वरूप् उसके जीवन में आये बदलाव का सार है यह डिजिटल वीडियो।
 
अभियान का यह द्वितीय चरण भी  ’हर बच्चे को चाहिए प्यार भरी देखभाल’ के विचार का निरंतर प्रसार करता है। सिंगापुर पब्लिसिस द्वारा बनाई गई ये कहानी, खुद निशा के शब्दों में कही गई है। निशा जो कि इक्थियोसिस से पीड़ित एक अनाथ लड़की है जिसे उसके असली माता-पिता ने तब त्याग दिया था जब वह मात्र दो हफ्ते की थी। उसके जीवन में परिवर्तन तब आया जब उसे अलोमा और डेविड लोबो ने गोद लिया। अलोमा और डेविड जिन्होंने अपने बच्चे होने के बावजूद निशा को भी एक परिवार देने का निर्णय लिया, ऐसा परिवार जिसने निशा को असीमित प्रेम और रुटचऑफकेयर’ के साथ अपनाया। यह फिल्म निशा की कहानी को बहुत ही अच्छे तरीके से प्रस्तुत करती है, जब वह जीवन की चुनौतियों और कठिनाइयों से गुजरती है, जहाँ उसकी माँ और उसका परिवार उसके साथ होता है. यह फिल्म बहुत खूबसूरत  तरीके से बताती है कि कैसे एक असाधारण लड़की निशा, उम्मीद, सपनों और चुनौतियों से भरी एक साधारण जिंदगी को आगे बढ़ाती है और कैसे अलोमा उसे इस तरह से बड़ा करती है कि वह भी स्वयं को औरों की ही तरह समझे, अलग नहीं।
 
निशा की इस कहानी को मिलने वाली प्रतिक्रिया से अभिभूत, निशा के पैरेंट्स अलोमा और डेविड, जो कि इस नई लॉन्च विक्स रुटचऑफकेयर फिल्म के नायक भी हैं, ने कहा-’हमें बहुत प्रसन्नता है कि निशा की कहानी विश्वस्तर पर पहचान रखने वाले विक्स रुटचऑफकेयर, अभियान का हिस्सा है. हमारी बिटिया की कहानी को इससे अच्छे तरीके से नहीं कहा जा सकता था, और हमें उम्मीद है कि वे लाखों लोग जो विक्स रुटचऑफकेयर की इस फिल्म को देखेंगे वे उन कमजोर लोगों को स्नेह देने और उनकी देखभाल करने को प्रेरित होंगे, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।’
 
गौरी सावंत, विक्स रुटचऑफकेयर के पहले सीजन में उपस्थित रहीं माँ और ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट, ने कहा-’ विक्स रुटचऑफकेयर अभियान ने मुझे एक माँ के रूप् में जो पहचान और सम्मान दिलाया उसे पाकर मैं बहुत अभिभूत हूँ. विक्स का यह अभियान ऐसे लोगों को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर रहा है और उनकी मदद कर रहा है जो इस दुनिया में असाधारण संवेदनशीलता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. यह दुनिया के लिए आशा की एक किरण की तरह है. मैं निजी तौर पर भी निशा की कहानी से बहुत अभिभूत हूँ और मुझे पूरा विश्वास है कि लोग उस पर भी वैसा ही प्यार और सह्रदयता लुटाएंगे जैसी उन्होंने मुझ पर लुटाई थी।’
 
ऋतु मित्तल, कंट्री मार्केटिंग मैनेजर, विक्स इण्डिया के अनुसार-’विक्स ऐसा ब्रांड है जो भारत में पीढ़ी दर पीढ़ी स्नेह और देखभाल का प्रतीक रहा है।इस ब्रांड ने हमेशा से देखभाल द्वारा जिंदगी को सकारात्मक रूप से बदल देने की ताकत पर विश्वास किया है। विक्स रुटचऑफकेयर का द्वितीय अभियान जैविक या रक्तसंबंधी रिश्तों से आगे ’परिवार’ के विचार को प्रसारित करता है। गौरी सावंत तथा अलोमा लोबो असाधारण देखभाल और स्नेह देने वाले लोगों का सटीक उदाहरण है। वे इस बात को दर्शाते हैं कि किस तरह हममें से प्रत्येक व्यक्ति हर जरूरतमंद बच्चे को बिना किसी शर्त प्रेम और देखभाल देने में सक्षम है। विक्स रुटचऑफकेयर के पहले संस्करण ने पूरे विश्व में लाखों लोगों के दिल को छुआ। हमें पूरा विश्वास है कि निशा की कहानी भी हर देखने वाले पर इसी तरह का असर करेगी।’
 
विक्स-वन इन मिलियन रुटचऑफकेयर एक बहुत ही सशक्त सन्देश लोगों को देती है  कि किस प्रकार हर बच्चा अतिरिक्त  देखभाल का अधिकारी है, फिर चाहे वह  बच्चा किसी भी रंग का हो, लड़का हो या लड़की और चाहे किसी भी चुनौती से क्यों न गुजर रहा हो. यह अभियान विशेष आवश्यकता वाले बच्चों  को गोद लेने के संदर्भ में  इसी बात को गहन  डाटा सहित स्पष्ट करता है. उल्लेखनीय है कि भारत में 2,96, 00, 000 बच्चे अनाथ हैं, इस के बावजूद पिछले साल मात्र 42 दिव्यांग बच्चों को परिवार मिल पाए थे. (संदर्भ’रू यूनिसेफ एस्टिमेट, स्टेट ऑफ वर्ल्डस चिल्ड्रन रिपोर्ट, 2016, सेंट्रल अडॉप्टेशन रिसोर्स अथॉरिटी, इंडिया)  विक्स रुटचऑफकेयर की स्पेशल स्क्रीनिंग के मौके पर क्रिकेटर गौतम गंभीर, अभिनेत्री सोहा अली खान तथा श्रिया सरन, निशा का समर्थन करने के लिए मौजूद थे। 
 
निशा की कहानी से प्रभावित गौतम गंभीर ने कहा-श्मैं विक्स रुटचऑफकेयर जैसे अभियान का हिस्सा बनकर सम्मानित हुआ हूँ, यह एक ऐसा अभियान है जिसने दुनिया भर में लाखों दिलों को छुआ है.  मैं निशा और अलोमा की असाधारण कहानी को फिल्म के रूप में साकार करने के लिए विक्स की प्रशंसा करता हूँ.  यह विक्स जैसे ब्रांड्स ही हैं जो समाज में स्वार्थ रहित प्रेम तथा बिना शर्त देख भाल जैसे मूल्यों को संरक्षित रखने में मदद करते हैं.श्
 
सोहा अली खान जो कि फिल्म के प्रीमियर के समय मौजूद थीं तथा फिल्म से बहुत प्रभावित हुईं, उन्होंने कहा -श्मैंविक्स रुटचऑफकेयर अभियान के पहले संस्करण से भी बहुत गहराई से प्रेरित हुई थी,  और मैं अब इस नई फिल्म को लेकर भी बहुत उत्साहित हूँ कि अब कौन सी प्रेरणा दाई कहानी सामने आएगी। विक्स-वनइनइनअमिलियन, टचऑफकेयर अभिभूत करने वाला है,  अलोमा की निशा के लिए निस्वार्थ देखभाल और निशा की स्थिति को लेकर उसका सामान्य व्यवहार इस बात को बहुत खूबसूरती से प्रदर्शित करता है कि कैसे परिवार रक्त संबंधी रिश्तों से भी आगे की बात है और कैसे असल में परिवार प्रेम और देखभाल की नींव पर खड़े होते हैं.श्
 
विक्स-वनइनमिलियन डिजिटल फिल्म 10 अक्टूबर 2018 से लाइव होगी। इसे पीआर और डिजिटल मीडिया के साथ मिलकर प्रस्तुत किया गया है और क्रमशः  2020 एमएसएल तथा मीडिया कॉम के साथ आगे बढ़ाया जायेगा।
 
फिल्म का सारांश
यह कहानी एक किशोरी निशा लोबो के जीवन पर आधारित सच्ची कहानी है, जिसे उसने अपने ही शब्दों में बयान किया है।कहानी के आगे बढ़ने पर जैसे-जैसे वह अपनी स्मृतियां साझा करती जाती है हमें पता चलता है कि वह एक रेयर जेनेटिक स्किन कंडीशन इक्थियोसिस से पीड़ित है। और हम उसे समाज की सोच और समाज द्वारा अस्वीकार किये जाने से की स्थिति से सामंजस्य बनाते हुए देखते हैं. जैसे-जैसे समय बीतता है वह बचपन के गुस्से और निराशा से आगे सूझ-बूझ और परिपक्वता की ओर  बढ़ती है.  इस बीच हम निशा और उसकी मां अलोमा लोबो, पिता डेविड और भाई-बहनों के बीच सुरक्षा, देखभाल और सहायता के बंधन को गहराते हुए देखते हैं.  उसके जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं पर उसकी जीत और एक सकारात्मक व्यंितव के तौर पर उसका उभरना उस के माता-पिता के लिए अब गर्व का विषय है.  अंत में हम इस बात को दर्शाते हैं कि निशा संघर्ष से सफलता तक की अपनी जीवन कथा उन माता-पिता के समूह को सुना रही है जो आगे जाकर किसी बच्चे को गोद लेने का इरादा रखते हैं और तब अचानक पहली बार इस रहस्य से पर्दा उठता है कि निशा स्वयं भी एक गोदली हुई बच्ची है.  एक अनाथ और खासकर एक लड़की वह भी एक प्रकार की शारीरिक समस्या सेग्रस्त,  होने के नाते, भारतीय आंकड़ों के अनुसार निशा को गोद लिए जाने की सम्भावना लगभग शून्य होती है  .लेकिन अलोमा और डेविड की असाधारण देखभाल और स्नेह उसे ऐसा एक अवसर देता है जो उसकी जिंदगी बदल देता है.  उसे सामान्य इंसानों के साथ फिर से जुड़ने का मौका देता है. अलोमा और डेविड निशा के मन में यह उम्मीद  जगाते हैं कि उसके जैसे अन्य बच्चों को भी भविष्य में ऐसा अवसर मिल सकता है। निशा के साथ ही यह उम्मीद हमारे मन में भी आशा का दीपक जलाती है.  

Source:Agency