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बेटों-बहुओं ने पैर छूकर मांगी माफी, सम्मान से लौटाया घर

By Sabkikhabar :10-08-2018 08:00


भोपाल। गुरुवार दोपहर 12 बजे, गोविंदपुरा एसडीएम कोर्ट... भरण पोषण की गुहार लगाने वाली 66 वर्षीय श्यामा देवांगन की झोली खुशियों से भर गई। तीन में से दोनों बेटों ने अपनी गलती मानते हुए मां को साढ़े चार लाख की एफडी, 10 तोला सोना और उनका घर किराएदार से खाली करवाकर दे दिया। इस तरह करीब 50 लाख रुपए की प्रॉपर्टी के कागजात लौटा दिए। यही नहीं बेटों और बहुओं ने मां के पैर छूकर माफी मांगी।

शपथ पत्र भरकर भी दिया कि अब वे मां का ख्याल रखेंगे। सप्ताह में एक दिन अपने बच्चों के साथ उनसे मिलने जाएंगे और दिनभर उनके साथ बिताएंगे। तीनों भाई मिलकर 10 हजार रुपए प्रतिमाह मां को भरणपोषण के लिए भी देंगे। यह देख मां का दिल भी पसीज गया और उन्होंने अपनी शिकायत वापस लेते हुए बेटों-बहुओं को माफ कर दिया। इस तरह एसडीएम मुकुल गुप्ता की सख्ती के कारण तीन हिस्सों में बंटा परिवार एक हो गया। यह देख कोर्ट में बैठे हर शख्स के आंखों में आंसू भर आए।

फिर शिकायत मिली तो जेल भेज दूंगा

बेटों द्वारा अपनी गलती मानने पर एसडीएम ने कहा कि फिलहाल तो मां आप लोगों को सजा नहीं देने के लिए कह रही हैं, लेकिन जो अपराध आपने किया है वह माफी योग्य नहीं है। अगर भविष्य में श्यामा जी को समय पर भरण पोषण नहीं मिलता है और वह शिकायत करती हैं तो मैं सभी बेटों को सीधे जेल भेज दूंगा।

गहने छीनकर घर से कर दिया था बेदखल

66 साल की बुजुर्ग मां श्यामा देवांगन ने प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं मिलने पर दो दिन पहले ही गोविंदपुरा एसडीएम कोर्ट में केस दायर किया था। एलआईजी ए सेक्टर सोनागिरी निवासी श्यामा के पति जीएस देवांगन भेल में फोरमैन थे। वर्ष-1999 में हो उनकी मौत हुई थी। महिला के तीन बेटे हैं। इनमें जोन-1 एमपी नगर निवासी दीपक देवांगन चार्टर्ड अकाउंटेंट है। दूसरा बेटा अरुण एमआईजी-265, अरविंद विहार में रहता है। वह भेल में डीजीएम है। तीसरा बेटा प्रकाश बेंगलुरू में रहता है।

श्यामा ने आरोप लगाया था कि अरुण और उसकी पत्नी युगांक्षी ने 10स तोला सोने के जेवर और आधा किलो चांदी अपने पास रख लिए थे। इसके बाद उन्हें घर से बेदखल कर दिया। तीनों बेटों के पास पर्याप्त दौलत है, फिर भी बुढ़ापे में वे मुझे नहीं रख रहे हैं। बार-बार कहने के बाद भी वे मुझे प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं दे रहे हैं। मां की पीड़ा को देखते हुए दो दिन तक लगातार सुनवाई हुई। एसडीएम की सख्ती से बेटों को अपनी गलती का अहसास हुआ।

होटल में रह रही थी बुजुर्ग

बेटों द्वारा घर से निकाले जाने के बाद बुजुर्ग मां एमपी नगर के एक होटल में रह रही थी। यहां से उन्होंने हक की लड़ाई लड़ी। आखिर अब वे सम्मान के साथ अपने घर में रह सकेंगी। बता दें कि इससे पहले मां 15 साल से डीजीएम बेटे के साथ रही थी।

85 वर्षीय बुजुर्ग पिता को रखना होगा अपने साथ, हर माह देने होंगे 4 हजार रुपए

भोपाल। बेघर करने के लिए घर में ताला लगा देने वाले दोनों बेटे-बहुओं को अब अपने बुजुर्ग पिता देवीप्रसाद (85 वर्ष) को घर में ही रखना होगा। साथ ही भरण पोषण करने के लिए दोनों को 2-2 हजार यानी कुल 4000 रुपए हर माह देने होंगे। यह आदेश गुरुवार को एसडीएम हुजूर राजकुमार खत्री ने बैरागढ़ चीचली निवासी बुजुर्ग देवीप्रसाद की भरण पोषण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। उन्होने आदेश में कहा कि दोनों पुत्रों को भरण पोषण की राशि प्रत्येक माह ही 5 तारीख को देना होगी। बता दें कि देवी प्रसाद ने तीन माह पहले शिकायत की थी कि दो बेटे जीवन सिंह व जसवंत सिंह और उनकी बहुएं रीना बाई और ममता बाई उन्हें प्रताड़ित करते हें।
 

Source:Agency