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जंतर-मंतर पर जुटा विपक्ष

By Sabkikhabar :06-08-2018 08:25


बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 34 बच्चियों से बलात्कार और शारीरिक प्रताड़ना की जघन्य घटना पर निंदा के स्वर अब दिल्ली से भी गूंजे। इस घटना पर नीतीश कुमार और उनकी सरकार के खिलाफ बिहार में विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल ही रखा था, अब दिल्ली के जंतर-मंतर में भी गैरभाजपाई दल इक_े हुए। लालू प्रसाद के राजनैतिक वारिस माने जाने वाले तेजस्वी यादव ने जंतर-मंतर पर धरने का ऐलान किया और विपक्षी दलों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई नेता डी राजा, जदयू से अलग हुए शरद यादव, टीएमसी से दिनेश त्रिवेदी, आप से संजय सिंह और सोमनाथ भारती, आईएनएनडी से दुष्यंत चौटाला, जेएनयू से उभरे कन्हैया कुमार और शेहला रशीद समेत कई पार्टियों के नेता एक मंच पर तेजस्वी यादव के साथ आए। और खास बात यह रही कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इस मौके पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने भाषण भी दिए। ये और बात है कि इन दोनों का आमना-सामना नहींहुआ।

राहुल गांधी जब पहुंचे, तब तक अरविंद केजरीवाल जा चुके थे। इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण में विपक्षी एकता का नजारा देखने मिला था। लेकिन वह मौका राजनीतिक था। इस बार एक गैरराजनीतिक मसले पर विपक्षी नेताओं ने भाजपा और जदयू के खिलाफ आवाज उठाई है। जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अक्सर बड़ी-बड़ी घटनाओं पर बहुत देर से अपना मुंह खोलते हैं और कई बार तो चुप्पी ही साधे रखते हैं। कुछ वैसा ही पैंतरा इस बार नीतीश कुमार ने आजमाया था। उन्होंने इतने बड़े दुष्कर्म कांड का खुलासा होने के बाद भी अपना मुंह नहीं खोला और अब विपक्षियों के हमले के बाद घिसा-पिटा बयान देकर कर्त्तव्यपालन की औपचारिकता निभा ली। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पर शर्म है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

लेकिन दोषियों को अब तक बचा कौन रहा है और कैसे इस जघन्य अपराध की खबर सरकार को नहीं हुई, इस पर कुछ बोलेंगे, इस बारे में संदेह है। इस कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ रोजाना ही नए खुलासे हो रहे हैं। उसके तीन अखबार थे, जिनकी प्रसार संख्या नाम मात्र को थी, लेकिन सरकार से विज्ञापन उसे भरपूर मिलते थे। उसके एनजीओ की रिपोर्ट ठीक न होने के बावजूद उसे महिला गृह का ठेका मिला था। उसके पास लाइसेंसी हथियार भी थे और राजनेताओं तक उसकी पहुंच भी थी। धन, बल और सत्ता तीनों की ताकत का इस्तेमाल वह अपने गलत धंधों के लिए करता रहा और सरकार उसे वित्तीय अनुदान देती रही। क्या सुशासन की परिभाषा यही है? राजद के कार्यकाल को जंगलराज कहकर नीतीश कुमार सत्ता में आए थे, तो अब जदयू और भाजपा के शासन में यह जो अनाचार हुआ है, उसे कौन सा विशेषण दिया जाए? बेटी बचाओ का नारा देने वाले नरेन्द्र मोदी कठुआ मामले पर भी देर से ही बोले थे, अब मुजफ्फरपुर कांड पर उनकी प्रतिक्रिया का देश इंतजार ही कर रहा है। 

जंतर-मंतर पर जिस तरह से तमाम बड़े दलों के नेता एकत्र हुए, उसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं, जो स्वाभाविक है। लंबे अरसे से विपक्षी दल मिलकर भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि मिलकर भाजपा का मुकाबला कर सकेें। जंतर-मंतर के मंच से राहुल गांधी ने कहा कि 'हम केवल 40 बच्चियों के लिए नहीं बल्कि हिंदुस्तान की सभी महिलाओं के लिए यहां आए हैं, एक तरफ बीजेपी-आरएसएस की सोच तो दूसरी तरफ पूरा हिंदुस्तान है और यह बात पीएम और उनकी पार्टी को भी दिखाई देगी।' इससे पहले कठुआ कांड के वक्त भी राहुल गांधी ने इंडिया गेट पर मोर्चा खोला था तो लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। ऐसे तमाम अवसरों पर राजनीतिक बयानबाजी होती ही है और सत्तारूढ़ भाजपा इसे विपक्ष की राजनीति करार देती है। जंतर-मंतर पर मुजफ्फरपुर कांड के विरोध में विभिन्न दलों के एकत्र होने के राजनैतिक निहितार्थ चाहे जो हों,उस मंच से बलात्कार की घटनाओं और बलात्कारियों को संरक्षण देने के खिलाफ जो आवाज उठी है, सरकार को वह भी सुननी चाहिए। कन्हैया कुमार ने सही कहा कि- आप देखेंगे कि इस तरह के कार्यक्रम में मंच पर जगह कम पड़ जाती है, लेकिन जरूरत इस बात की है इस देश की सड़कों पर जगह कम पड़ जानी चाहिए। इस जघन्य अपराध के $िखलाफ, इस बलात्कार के खलाफ। 
 

Source:Agency