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किकी चैलेंज का बुखार

By Sabkikhabar :04-08-2018 08:57


सोशल मीडिया अब केवल संवाद या जानकारियों के लेन-देन का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह सस्ती शोहरत पाने का औजार भी बन गया है। लाखों लोगों की निगाह में आने के लिए किसी खास हुनर, मेहनत, संघर्ष या रचनात्मकता की दरकार अब नहीं है। बस कुछ अलग हटकर कीजिए, ऊटपटांग कीजिए और आप रातों-रात चर्चा में आ सकते हैं। भारत में ही पिछले दिनों प्रिया प्रकाश का आंख मारना या डब्बू अंकल के ठुमके लगाना कैसे चर्चा में आ गए थे, यह सबने देखा था। सोशल मीडिया की जुबान में ऐसी लोकप्रियता को वायरल होना कहते हैं, और सचमुच यह किसी बीमारी से कम है भी नहीं।

इंटरनेट के बुखार या सोशल मीडिया वायरल का एक नया रूप इन दिनों सामने आया है, नाम है 'किकी डांस चैलेंज । अमेरिकी गायक ड्रेक का एक नया गाना इन दिनों हिट हुआ है किकी डू यू लव मी। इस गाने पर कॉमेडियन शिगी ने धीमी गति से चल रही कार से उतरकर नृत्य करते हुए अपना वीडियो इंस्टाग्राम पर डाला था। उसके बाद से यह वायरल फीवर पूरी दुनिया में फैल गया और हजारों लोग यह चैलेंज लेते दिखे।

इन माई फीलिंग्स चैलेंज के नाम से भी पहचाने जाने वाले 'किकी चैलेंज'  में चलती हुई कार से उतरकर  'किकी डू यू लव मी' पर डांस करने की चुनौती दी जाती है। चुनौती लेने वाले को धीमी रफ्तार से चल रही कार के साथ-साथ चलते नृत्य करना होता है और फिर उसी तरह चलती कार में बैठ जाना होता है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकना पूरी दुनिया के लिए पहले ही कम चुनौतीपूर्ण नहीं था कि अब किकी चैलेंज ने इसे और बढ़ा दिया है।

इस जोखिम भरी चुनौती के खिलाफ विश्व के कई देशों की पुलिस ने परामर्श जारी किया है। जहां तक भारत का सवाल है, तो यहां किकी चैलेंज का फैलना और भी खतरनाक है, क्योंकि यातायात नियमों का पालन यहां नगण्य है। देश में जितनी तेजी से आबादी बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से सड़क पर गाड़ियों की संख्या भी बढ़ रही है, और नियमों को तोड़ने वालों की संख्या भी। गाड़ी चलाते मोबाइल पर बात करने, ईयरफोन लगाकर चलने या सेल्फी लेने के कारण ही न जाने कितने लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं, तिस पर यह किकी चैलेंज और जानलेवा साबित हो सकता है। गनीमत है कि पुलिस प्रशासन इस बारे में सतर्कता दिखा रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस चैलेंज के खतरे के बारे में लोगों, खासकर बच्चों को जागरूक करने के लिए ट्वीट कर एक संदेश जारी किया है। राज्य पुलिस के आधिकारिक हैंडल से किये गये ट्वीट में बच्चों के माता-पिता को सम्बोधित करते हुए कहा गया है  'चाहे किकी आपके बच्चों को प्यार करे या ना करे, लेकिन हमें यकीन है कि आप जरूर करते हैं! तो जिंदगी की सभी चुनौतियों में अपने बच्चों के साथ खड़े रहें, बस किकी चैलेंज को छोड़कर। पुलिस ने तो अपना दायित्व निभाया है, लेकिन इसका असर तभी होगा, जब आम जनता भी सोशल मीडिया के ऐसे खतरनाक पहलू के बारे में सचेत होगी। 

याद करें कुछ समय पहले ब्लू व्हेल नाम के खेल ने कितने लोगों की जान ले ली थी, इनमें किशोरों और युवाओं की संख्या अधिक थी। इस तरह के खेल या चैलेंज बनाने वाले तो इंटरनेट पर लाखों, करोड़ों लोगों तक अपनी पहुंच बनाकर बड़ी कमाई कर लेते हैं, लेकिन उसका असर कितना घातक होता है, यह फिक्र कौन करेगा? जाहिर है समाज को ऐसे में अपनी समझ का परिचय देना चाहिए। जहां तक सवाल सरकारों का है, तो वे तभी हरकत में आती हैं, जब पानी सिर से ऊपर निकलने लगता है। और भारत की तो बात ही क्या करें? अभी कुछ दिनों पहले ही मोदीजी सोशल मीडिया पर विराट कोहली का फिटनेस चैलेंज लेते दिख रहे थे।

देश का प्रधानमंत्री चुस्त-दुरुस्त, सेहतमंद है, यह अच्छी बात है। भले ही फिटनेस चैलेंंज सेहत के प्रचार के लिए था, लेकिन क्या मोदीजी को यह विचार नहींकरना चाहिए था कि अगर वे सोशल मीडिया पर एक चैलेंज लेंगे, तो आगे इस तरह के चलन को और बढ़ावा मिलेगा। और यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि हर चैलेंज अच्छी बातों के प्रचार के लिए ही हो। जब जनता देखेगी कि देश का मुखिया सोशल मीडिया चैलेंज को स्वीकार रहा है, तो वह भी वैसा करने को उत्सुक होगी। उम्मीद है नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार सोशल मीडिया के इस खतरनाक पहलू की ओर जनता को जागरूक करेंगे। मोदीजी चाहें तो मन की बात में इसका जिक्र कर युवाओं को ऐसी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने से बचने की सलाह भी दे सकते हैं। 
 

Source:Agency