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इमरान खान : कप्तान से वजीरे आजम तक

By Sabkikhabar :27-07-2018 08:13


पाकिस्तान के 71 साल के इतिहास में राजनैतिक उठापटक का लंबा दौर रहा है। कई बार सैन्य तानाशाही रही, लोकतांत्रिक सरकारों को तख्तापलट के षड्यंत्र का शिकार बनना पड़ा। राजनैतिक हत्याएं हुईं और दिग्गज नेताओं को नजरबंदी, निर्वासन आदि से गुजरना पड़ा। सेना, आईएसआई और चरमपंथी संगठनों ने हमेशा कोशिश की कि लोकतंत्र यहां पैर न जमा पाए। लेकिन ये पाकिस्तानी अवाम का जज्बा है कि उसे जब भी मौका मिला, उसने जान की परवाह किए बगैर लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इस बार भी चुनावी परिदृश्य ऐसा ही था। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपनी बेटी समेत जेल में हैं, लेकिन उनके भाई ने चुनावी मैदान संभाला था। दूसरी ओर भुट्टो परिवार भी अपनी किस्मत आजमाने निकला था।

हाफिज सईद ने अपने रिश्तेदारों पर दांव लगाया था। और आतंकवादियों ने इस बार भी रैलियों और मतदान के दौरान धमाके कर के लोगों को चुनाव से दूर रखने की कोशिश की। लेकिन उनकी कोशिशें नाकाम रहीं, क्योंकि जनता ने शांतिपूर्ण और स्थिर पाकिस्तान की चाहत में मतदान किया। इस बार के चुनाव इसलिए भी महत्पूर्ण हैं क्योंकि पाकिस्तान के इतिहास में दूसरी बार एक लोकतांत्रिक नागरिक सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद दूसरी लोकतांत्रिक सरकार को सत्ता सौंपने जा रही है। मतदान से पहले तक कयास यही लगाए जा रहे थे कि नवाज शरीफ की पाकिस्तानी मुस्लिम लीग (एन) को जनता की सहानुभूति मिलेगी। उनके भाई शाहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब भी संजो लिया था। उन्होंने पाकिस्तान को मलेशिया और तुर्की के बराबर ले जाने का दावा किया था। लेकिन उनकी हार से सारे ख्वाब धराशायी हो गए। भुट्टो खानदान से बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो भी हार गए। ये दोनों दल क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे हैं, और उनके पिछड़ने के साथ ही पाकिस्तान की राजनीति से शरीफ और भुट्टो परिवार की विदाई नजर आ रही है। जबकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के इमरान खान पाकिस्तान की सियासत के नए सरताज बनकर उभरे हैं।

राजनीति में आने से पहले इमरान खान क्रिकेट जगत के सितारे थे। उनकी कप्तानी में ही 1992 में पाकिस्तान ने अब तक का एकमात्र विश्वकप जीता है। इमरान $खान कितने बड़े क्रिकेटर रहे हैं इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि 1987 में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम के लिए 1988 में फिर से बुलाया गया और फिर 39 साल की उम्र में उन्होंने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को विश्व कप दिलाया। उनके खेल और कप्तानी के मुरीद दुनिया भर में हैं। क्रिकेट के बााद इमरान खान फिर चर्चा में आए, जब अपनी मां की याद मेंं उन्होंने कैैंसर अस्पताल बनवाया और इसके लिए घूम-घूमकर चंदा इक_ा किया। खेल, समाजसेवा के अलावा उनकी तीन शादियां भी चर्चा का विषय रहीं।

उनकी पूर्व पत्नी ने उन पर कई तरह के इल्जाम भी लगाए। लेकिन फिर भी इमरान खान की राजनीतिक छवि उससे प्रभावित नहीं हुई। इसका एक बड़ा कारण उनकी भ्रष्टाचार विरोधी छवि रही है। 1996 में जब उन्होंने पीटीआई की स्थापना की थी, तब जनता ने चुनावों में उन्हें नकार दिया था। 2002 में उनकी पार्टी से केवल उन्हें ही चुनाव में जीत मिली। इन असफलताओं के बावजूद उनके तेवर कमजोर नहीं पड़े और स्वच्छ सरकार, भ्रष्टाचार विरोधी $कानून, स्वतंत्र न्यायपालिका, दुरुस्त पुलिस व्यवस्था, आतंकवाद विरोधी पाकिस्तान जैसे मुद्दों को लेकर वे जनता के बीच जाते रहे। आज उनकी जीत में इन मुद्दों का बड़ा हाथ है, क्योंकि पाकिस्तानी जनता भी यही चाहती है।

उन्होंने मतदाताओं से भावुक अपील की कि दो पार्टियों ने मुल्क को 30 साल लूटा। आज आपके सामने मौका है कि मुल्क की तकदीर और तदबीर दोनों बदल डालें। आप किसी भी पार्टी को वोट दें, लेकिन खुदा के लिए वोट करें।... मैं एक खिलाड़ी हूं। देश के लिए 21 साल मैदान पर रहा। मैं आखिरी गेंद तक जीत या हार नहीं मानता। जाहिर है जनता ने पाकिस्तान की सूरत बदलने के लिए इमरान खान को चुन लिया। सवाल यह है कि क्या वे इस भरोसे पर खरे उतरेंगे? क्योंकि उन पर सेना का समर्थन हासिल करने का इल्जाम है और पाकिस्तान में सेना अपने से आगे किसी राजनेता को नहीं निकलने देना चाहती है। भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर एक संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि उनकी पार्टी भारत के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते चाहती है और वो बातचीत से इस मसले को सुलझाना चाहेंगे, और कश्मीर मामले में पाकिस्तान तटस्थता से अपना रुख संयुक्त राष्ट्र के साथ रखेगा। लेकिन क्या सेना उन्हें ऐसा करने देगी?

पाकिस्तान की नयी सरकार के सामने चीन के दबाव को झेलना भी बड़ी चुनौती है, चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर में चीन का करीब 62 अरब डॉलर दांव पर लगा हुआ है। इमरान खान ने सीपीईसी के कई प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता के अभाव और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सरकार की आलोचना की थी। सत्ता में आने के बाद उनका रुख क्या रहेगा, यह देखना होगा। आतंकवादियों को पनाह देने के कारण पाकिस्तान दुनिया भर में कुख्यात है। इमरान खान इस बदनामी से कैसे निपटते हैं, यह देखना भी दिलचस्प होगा। 
 

Source:Agency