By: Sabkikhabar
12-07-2018 09:34

भोपाल से सटे जंगल में 10 महीने से घूम रहे नन्हें शावकों को बाघिन मां की पहचान मिल गई है। यानी दोनों शावकों का वन विभाग ने नामकरण कर दिया है। अब ये शावक बाघ टी-1231 और टी-1232 के नाम से जाने जाएंगे।

वन विभाग ने इन शावकों का नामकरण उनकी मां बाघिन टी-123 के नाम के आखिरी के दो अंकों को आधार मानकर किया है। बता दें कि बाघिन के नाम के आखिरी के दो अंक 23 हैं। शावकों के नाम के बीच के दो अंक भी 23 ही रखे गए हैं। वन विभाग ने शावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नामकरण किया है ताकि नाम के आधार पर उनकी निगरानी आसानी से की जा सके।

दस्तावेजों में ऐसे दर्ज होगी शावकों की पहचान

बाघों की पहचान उनके ऊपर पाई जाने वाली धारियों के पैटर्न से होती है। यानी प्रत्येक बाघ के ऊपर पाई जाने वाली धारियों का पैटर्न अलग-अलग होता है। जिन बाघों को नाम (अल्फाबेटिकल व न्यूमेरिक) नामों से जाना जाता है। बाघ के नाम के साथ उसके शरीर पर पाई जाने वाली धारियों के पैटर्न की जानकारी होती है। भोपाल सामान्य वन मंडल के कंजरवेटर फॉरेस्ट (सीएफ) डॉ. एसपी तिवारी ने बताया कि भोपाल के नजदीक घूम रहे शावकों के नाम के साथ भी उनके शरीर पर पाईं जाने वाली धारियों के पैटर्न का उल्लेख किया जाएगा। कौन सा शावक नर है और कौन सा मादा, इसके पहचान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

ऐसे पड़ा शावकों की मां का नाम बाघिन टी-123

कंजरवेटर फॉरेस्ट भोपाल डॉ. एसपी तिवारी के मुताबिक 6 साल पहले बाघ टी-1 व बाघिन टी-2 रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से भोपाल के नजदीक आकर बसे थे। पहले से भी बाघों का भोपाल के नजदीक तक आना-जाना था। तब दोनों के बीच मेटिंग से बाघिन टी-2 ने एक मादा शावक को जन्म दिया। जिसका नाम टी-21 रखा गया। दूसरी बार मेटिंग हुई तो बाघिन टी-2 ने तीन शावक (दो मेल, एक फीमेल) को जन्म दिया। इनका बाघ टी-211, बाघ टी- 212 व बाघिन टी- 213 नाम रखा गया।

इस तरह भोपाल के जंगल में वयस्क और अवयस्क बाघों की संख्या 2 से बढ़कर 6 हुई। तीन साल पहले बाघिन टी-2 की बेटी बाघिन टी-21 मां बनी। उसने चार शावक (दो मेल, दो फीमेल) को जन्म दिया। इनका नाम बाघ टी-121, बाघ टी-122, बाघिन टी-123 व बाघिन टी-124 रखा गया। इस तरह 6 साल में बाघों की संख्या 2 से बढ़कर 10 हो गई। हालांकि इनमें से बाघ टी-211 देवास व बाघ टी-212 को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व शिफ्ट कर दिया है। इन्हीं में से बाघिन टी-123 रातापानी अभयारण्य से भोपाल के जंगल तक घूम रही थी। जिसने 10 महीने पहले दो शावकों को जन्म दिया था।
 

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