By: Sabkikhabar
11-07-2018 06:00

नई दिल्ली. कश्मीर में इस साल अब तक 82 युवकों ने आतंकवाद का रास्ता पकड़ा है. सेना के जवान अब घाटी में  बच्चों के घरवालों को ये संदेश दे रहे हैं कि आतंकवाद के रास्ते की केवल एक मंजिल है और वो है मौत। इसलिए वो अपने बच्चों से आतंक का रास्ता छोड़ने के लिए कहें। सुरक्षाबलों ने इस दौरान बड़ी संख्या में आंतकवादियों का आत्मसमर्पण भी कराया है। बता दें कि इसी समय में सुरक्षाबलों ने 101 आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा है.

आतंकी के पिता को पड़ा दिल का दौरा
आतंकवादी बनने वालों में सबसे ज्यादा तादाद दक्षिण कश्मीर के पुलवामा और शोपियां के युवाओं की है, जहां से 20-20 युवकों ने ये रास्ता पकड़ा। मंगलवार को शोपियां में एक मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए। दोनों ही स्थानीय थे और केवल दो महीने पहले हिज़बुल मुजाहिदीन में भर्ती हुए थे। इनमें से एक आतंकवादी के सुरक्षा बलों के फंदे में फंसने की ख़बर मिलने के बाद उसके पिता को दिल का दौरा पड़ा और उनकी भी मौत हो गई।

ऐसे तैयार होते हैं 
नए युवकों को आतंक के मकड़जाल में फंसाने के लिए मारे गए आतंकवादियों के अंतिम संस्कार का मौका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इस दौरान हज़ारों लोग एकत्र होते हैं और किशोरों को आतंक से जुड़ने की कसम दिलाई जाती है। इसके कुछ ही दिन में आतंकवादी उसे अपने साथ ले जाते हैं और नाममात्र की ट्रेनिंग देकर आतंक की अंधी राह में धकेल देते हैं। ऐसे में वो सुरक्षा बलों के आसान शिकार बन जाते हैं। हालांकि, सुरक्षा बल अक्सर मुठभेड़ के दौरान भी ऐसे युवकों की उनके घरवालों से बात कराकर हथियार डालने के लिए तैयार करते हैं। कई बार इनके अच्छे नतीजे भी निकले हैं।

घर वापसी का रास्ता कर देते हैं बंद 
इस साल अभी तक अप्रैल के महीने में सबसे ज्यादा 25 युवकों ने आतंक का रास्ता चुना। विशेषज्ञों के मुताबिक एक अप्रैल को शोपियां और अनंतनाग में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 13 आतंकवादी मारे गए थे। इसके बाद हुए अंतिम संस्कारों का इस्तेमाल आतंकवादियों ने अपनी भर्ती बढ़ाने के लिए किया। सेना के सूत्रों के मुताबिक नए रिक्रूट्स को ट्रेनिंग के नाम पर केवल एके-47 से कुछ फायर ही कराए जाते हैं। आतंकी इसके बाद हथियार के साथ उसकी फोटो जारी कर देते हैं जिससे उसकी वापसी का रास्ता बंद हो जाता है.  

हथियारों की कमी
सीमा पर सुरक्षा की कड़ी घेरेबंदी के कारण इस समय आतंकवादी गिरोह हथियारों की कमी झेल रहे हैं। सेना के सूत्रों के मुताबिक बड़ी तादाद में नए आतंकवादी भर्ती होने के साथ ही ये कमी और महसूस होगी। इसका अर्थ ये है कि आने वाले दिनों में आतंकवादी हथियार छीनने की ज्यादा कोशिश करेंगे।
 

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