By: Sabkikhabar
06-07-2018 07:28

आईडीबीआई बैंक में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के 51 फीसद हिस्सेदारी खरीदे जाने का फैसला घाटे का नहीं बल्कि फायदे का सौदा साबित हो सकता है। पिछले वित्त वर्ष की मार्च तिमाही में आईडीबीआई को कुल 5662.76 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के मुकाबले दोगुना था।

2016-17 की आखिरी तिमाही में बैंक को कुल 3199.77 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। ऐसी स्थिति में जब एलआईसी ने बैंक की 51 फीसद हिस्सेदारी खरीदने का फैसला लिया तो उसे लेकर सवाल उठने लगे। इसकी वजह सरकारी बैंकों में एलआईसी के निवेश पर हुआ घाटा है। आंकड़े बताते हैं कि एलआईसी ने 21 सरकारी बैंकों में निवेशकों का पैसा लगा रखा है, जिनमें से महज तीन बैंक ने उसे रिटर्न दे पाए हैं।

केजरीवाल एंड इन्वेस्टमेंट सर्विस के सचिव अरुण केजरीवाल बताते हैं कि सरकारी बैंकों में एलआईसी के निवेश से जुड़ी एक रिपोर्ट भले ही उजली तस्वीर न पेश कर रही हो, लेकिन असल मायनों में यह एक गुड आइडिया है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा हालत को देखते हुए इसे ''गुड आइडिया'' कहा जा सकता है।

केजरीवाल ने कहा कि इस डील से संकट का सामना कर रहे आईडीबीआई और अकूत बचत के भंडार पर बैठी हुई एलआईसी दोनों को ही फायदा होगा। उन्होंने कहा, ''एलआईसी के पास पैसा है और वो निवेश करने की स्थिति में हैं। ऐसे में अगर वो बैंक में अपना पैसा लगाता है तो जाहिर तौर पर उसके हालात सुधरेंगे।''

बैंक बढ़ा सकता है अपना कस्टमर बेस: आईडीबीआई बैंक में निवेश के जरिए एलआईसी अपना कस्टमर बेस बढ़ा सकता है। अगर कुछ फीसद एलआईसी होल्डर भी बैंक से जुड़ पाए तो बैंक को काफी फायदा पहुंच सकता है। इससे भी एलआईसी और आईडीबीआई बैंक दोनों को फायदा होगा।

पहुंच बढ़ा सकता है आईडीबीआई बैंक: जैसा कि आईडीबीआई बैंक का यूजर बेस कम है, लिहाजा अगर एलआईसी उससे जुड़ता है तो वो अपनी रेंज को और विस्तार दे सकता है। जैसा कि एलआईसी की पहुंच फिलहाल ज्यादा है और आईडीबीआई बैंक की कम, ऐसे में बैंक को सीधे तौर पर फायदा हो सकता है। बैंक की पहुंच बढने का सीधा सा मतलब है कि बैंक की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

सुधरेंगे बैंकों के हालात: जैसा की हम सभी जानते हैं कि बैड लोन और लोन डिफॉल्ट जैसी समस्याएं अधिकांश सरकारी बैंकों के साथ हैं। ऐसे में अगर एक पैसे वाला (एलआईसी) बैंक (आईडीबीआई) में निवेश करेगा तो बैंक की मौजूदा परिस्थिति में सुधार दिखेगा। जैसे ही बैंक रिकवरी करेगा इसका फायदा साफतौर पर दिखने लगेगा।

अर्थव्यवस्था को फायदा: अगर आईडीबीआई बैंक में एलआईसी के निवेश से बैंक की हालत दुरुस्त होती है तो जाहिर तौर पर इससे बैंक और बैंक ग्राहकों के साथ ही अर्थव्यवस्था को भी सीधे तौर पर फायदा होगा। जैसे ही बेहतरी के साथ बैंक अपनी बैलेंस सीट को दुरूस्त करेगा वह अपने ग्राहकों को और बेहतर सेवाएं मुहैया कराने की स्थिति में आ पाएगा।
 

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