By: Sabkikhabar
05-07-2018 07:12
  • नये आंकड़े दर्शाते हैं कि हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन योनिक जन्म के कारण होने वाले अतिरिक्त रक्तस्त्राव (पोस्टपार्टम हेमरिज (पीपीएच)) की रोकथाम में आॅक्सिटोसिन, देखरेख के वर्तमान मानक, जितना ही प्रभावी है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा लगभग 30,000 महिलाओं पर पीपीएच की रोकथाम में किए गए सबसे बड़े अध्ययन के परिणामों को न्यू इंग्लैंड जर्नल आॅफ मेडिसन में आज प्रकाशित किया गया है।
  • इस प्रकाशन में निष्कर्ष निकला है कि इस अध्ययन के बारे में उन देशों को जानकारी प्रदान की जानी चाहिए जहां औषधियों के कोल्ड-चेन ट्रांसपोर्ट एवं उनके वितरण की सुविधा नहीं है, जो कि पीपीएच की प्रभावी रोकथाम में बाधक है।

सेंट-प्रेक्स, फेर्रिंग फर्मास्यूटिकल्स ने कार्बेटोसिन के हीट-स्टैबल फाॅम्र्यूलैशन के यौनिक जन्म के पश्चात् अतिरिक्त रक्तस्त्राव, जिसे पोस्टपाॅर्टम हेमरिज के रुप में भी जाना जाता है, की रोकथाम के लिए वर्तमान देख-रेख मानक, आॅक्सिटोसिन के जितना ही प्रभावी होने की घोषणा की हैं।  फेर्रिंग एवं एमएसडी फाॅर मदर्स के सहयोग से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा किए गए चैम्पियन क्लिनिकल परीक्षण के परिणामों को न्यू इंग्लैंड जर्नल आॅफ मेडिसिन (एनईजेएम) में प्रकाशित किया गया है। पीपीएच की रोकथाम के लिए दस देशों में 30,000 महिलाओं पर यह सबसे बड़ा अध्ययन किया गया है।
प्रत्येक वर्ष 14 मिलियन महिलायें पीपीएच द्वारा प्रभावित होती है। हालांकि इसमें से अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है, पूरी दुनिया में मातृत्व मृत्यु के मामले में पीपीएच प्रत्यक्ष कारण हैं, जिससे प्रति वर्ष लगभग 70,000 मौतें होती हैं। फेर्रिंग फर्मास्यूटिकल्स के चीफ मेडिकल आॅफिसर क्लाउस डुगी ने कहा, ‘‘पीपीएच की रोकथाम में यह एक महत्वपूर्ण कदम हैं तथा इसके परिणाम स्वरुप लाखों महिलाओं के जीवन को बचाने में हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन के लिए मार्ग प्रशस्त होगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां कोल्ड-चेन ट्रांसपोर्ट एवं स्टोरेज की सुविधा नहीं है।’’ उन्होंने यह भी कहा ‘‘हम अब उन देशों में हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन को बनाने के लिए डब्ल्यूएचओ एवं एमएसडी के साथ कार्य करेंगे, जहां इसकी ज्यादा जरुरत हैं, जिससे पूरी दुनिया में महिलाओं एवं परिवारों की रक्षा हो सकेगी।
फेर्रिंग द्वारा किए गए अनुसंधान एवं विकास कार्य से महिलाओं के स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा किया जा सकेगा, हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन उच्च तापमान पर भी प्रभावी रहेगा, यह आॅक्सीटोसिन के महत्वपूर्ण सीमित दायरे की तरह नहीं होगा, क्योंकि उसे 2-8 डिग्री सेंटीग्रेड पर ही रखना एवं परिवहन करना आय वाले होता है। निम्न एवं निम्न मध्य आये वाले देशों में किए गए अध्ययन में स्पष्ट हुआ है कि आॅक्सीटोसिन के प्रभाव में काफी डेग्रडेशन एवं हानि होती है, जो कि अपर्याप्त भंडारण एवं वितरण की स्थिति के कारण होता है। आंकड़े दर्शाते हैं कि हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन 30 डिग्री सेंटीग्रेड पर कम से कम 3 वर्षों तक तथा 40 डिग्री सेंटिग्रेड पर 6 महीने तक प्रभावी होता है। हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन से निम्न एवं निम्न मध्य आय वाले देशों में हजारों महिलाओं के जीवन की रक्षा की जा सकती है, जहां 99 प्रतिशत पीपीएच संबंधी मौतें होती हैं। तथा वहां पर औषधियों को रखने के लिए रेफ्रिजरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। 
इस चैम्पियन परीक्षण को फेर्रिंग के हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन का उपयोग कर यूएनडीपी-यूएनएफपीए-यूनिसेफ-डब्ल्यूएचओ-वल्र्ड बैंक स्पेशल प्रोग्राम आॅफ रिसर्च, डेवलपमेंट तथा रिसर्च ट्रेनिंग इन ह्यूमन रिप्रोडक्शन (एचआरपी) सहित डब्ल्यूएचओ के डिपार्टमेंट आॅफ रिप्रोडक्टिव हेल्थ एवं रिसर्च द्वारा संचालित किया गया है तथा इसे एमएसडी फाॅर मदर्स द्वारा कोष पोेषित किया गया है। फेर्रिंग अब पंजीकरण करेगी तथा हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन का उत्पादन करेगी। सभी पक्ष उन निम्न एवं निम्न मध्य आय वाले देशों के सार्वजनिक क्षेत्रों में वाजिब एवं वहनीय किम्मत पर हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक साथ कार्य करेंगे, जहां मातृ मृत्यु अधिक है।

  • ऽ    हीट-स्टैबल कार्बेटोसिन की उपलब्धता संबंधित देशों में नियामक समीक्षा एवं स्वीकृति का विषय है। 
  • ऽ    मार्क एंड को., इंक, केनिलवार्थ, एन.जे., यू.एस.ए. के रुप में विदित। 
     
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