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सवाल लोकतंत्र का है

By Sabkikhabar :30-05-2018 08:24


कैराना, गोंदिया-भंडारा और पालघर समेत देश की चार लोकसभा सीटों और दस विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए सोमवार को वोट डाले गए। ये उपचुनाव 2019 के आम चुनावों के लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं। हाल ही में संपन्न कर्नाटक चुनाव में भाजपा के हाथों सत्ता आकर निकल गई, उससे पहले उत्तरप्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर में उसे सपा-बसपा गठबंधन से मात खानी पड़ी। पालघर में सहयोगी शिवसेना ने ही भाजपा के आगे चुनौती पेश की है। जबकि गोंदिया-भंडारा से नानाभाऊ पटोले ने भाजपा से नाराज होकर इस्तीफा दिया था, इसलिए वहां उपचुनाव की नौबत आई।

देश को कांग्रेस मुक्त करने का दंभ भरने वाली भाजपा, एक-एक सीट पर अपनी सत्ता बचाने के लिए जिस तरह हाथ-पांव मार रही है, उससे अनुमान लगाया जा सकता है कि देश की राजनीति अभी इकतरफा नहीं हुई है और इसके कई आयाम हैं, जिन्हें देखने और समझने की जरूरत है। वैसे लोकतंत्र की खूबसूरती ही विविधता में है। अगर एक पक्ष ही हावी रहा तो लोकतंत्र की महत्ता कम होने लगती है। वैसे लोकतंत्र की बुनियादी शर्त निष्पक्ष-पारदर्शी चुनाव हैं, जिनमें जनता वोट के जरिए अपना जनप्रतिनिधि चुनती है। लेकिन इस निष्पक्षता पर सवाल उठने लगें तो यह न केवल चिंताजनक है, बल्कि खतरनाक भी है, क्योंकि भारत जैसे देश का अस्तित्व मजबूत लोकतंत्र पर ही टिका रह सकता है। 

पहले चुनावों में बूथ पर कब्जा, हिंसा, बैलेट पेपर पर फर्जीवाड़ा करने की खबरें आती थीं, तो इनसे निपटने के लिए ईवीएम यानी इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन लाई गई। इंसानों से गलती होती है, मशीनों से गलती नहीं होती है, यह मान लिया गया। लेकिन यहां सवाल इंसान की गलती का नहीं बल्कि नीयत का है। अगर बैलेट पेपर से फर्जीवाड़ा किया जा सकता है, तो मशीनों से भी छेडख़ानी हो सकती है। ईवीएम को लेकर भी कई राजनीतिक दल यही सवाल उठाते रहे हैं, खासकर भाजपा के शासन में हुए चुनावों में बार-बार ईवीएम के जरिए फर्जी वोट डालने का आरोप लगा। एक जमाने में भाजपा भी ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती थी, अब नहीं उठाती।

चुनाव आयोग भी कहता रहा कि ईवीएम में कोई गड़बड़ी नहीं की जा सकती। हाल में वीवीपैट की व्यवस्था भी कर दी गई, जिसमें मशीन पर जिस निशान पर बटन दबाया गया, उसकी पर्ची मतदाता को मिलेगी, ताकि वह सुनिश्चित कर सके कि उसका वोट उसकी मर्जी से ही गया है। पर सोमवार को हुए उपचुनावों में फिर ईवीएम की गड़बड़ी का मामला उठा। उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र के कई मतदान केेंद्रों में ईवीएम के ठीक से काम न करने की शिकायत सामने आई।

कई मतदाताओं को बिना वोट दिए ही वापस लौटना पड़ा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि उत्तरप्रदेश में दलित और मुस्लिम बहुल इलाकों के कई मतदान केेंद्रों में ईवीएम खराब हुई हैं। राष्ट्रीय लोकदल की उम्मीदवार ने तो इसकी लिखित शिकायत चुनाव आयोग से की, जबकि आज प्रेस कांफ्रेंस कर अखिलेश यादव ने ईवीएम से मतदान को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और कहा कि आगे चुनाव बैलेट पेपर से ही होना चाहिए।  ईवीएम की गड़बड़ी की शिकायत पर चुनाव आयोग ने पहले तो बड़ा मामला नहीं बताया, बाद में इसके लिए गर्मी को जिम्मेदार ठहराया। और अब कैराना, नूरपुर के कुछ 73 बूथों पर फिर से मतदान कराने का फैसला लिया गया है, यानी गड़बड़ी हुई है, यह साबित होता है। अब यह जांच का विषय है कि ईवीएम को मौसम ने बिगाड़ा या स्वार्थ की राजनीति ने। राजनीतिक दलों का काम एक-दूसरे पर आरोप लगाना है, लेकिन चुनाव आयोग की अपनी साख और विश्वसनीयता है, जिसकी रक्षा उसे हर हाल में करनी चाहिए। कम से कम चुनाव आयोग राजनीति के फंदे से खुद को बचाए और चाहे बैलेट पेपर हो या ईवीएम और वीवीपैट, स्वस्थ चुनाव सुनिश्चित कराए। आखिर सवाल हमारे लोकतंत्र की रक्षा का है। 

Source:Agency