By: Sabkikhabar
19-04-2018 08:01

सामाजिक दृष्टि से भी बिटकॉइन हानिप्रद है। बड़े कम्प्यूटरों में भारी मात्रा में बिजली की बर्बादी केवल एक आर्टिफिशियल पहेली को हल करने में लगाई जाती है। जैसे हमने एक कागज पर लाइन बनाई फिर मिटाई फिर लाइन बनाई फिर मिटाई। हमने इस लाइन को बनाने और मिटाने में आनन्द पाया। इसी प्रकार बिटकॉइन की पहेली बनाने और हल करने में लोग आनन्द प्राप्त करते हैं। इसे बौद्धिक विलासिता कहा जा सकता है। इसका सामाजिक दुष्प्रभाव यह है कि इसमें बिजली और संसार के प्राकृतिक संसाधनों की भयंकर बर्बादी हो रही है। अत: रिजर्व बैंक द्वारा बिटकॉइन पर प्रतिबन्ध लगाना सही है और इसको आगे बढ़ाना चाहिये। 

रिजर्व बैंक ने देश के बैंकों को आदेश दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक करेंसी जैसे बिटकॉइन में वे व्यापार न करें। इस इलेक्ट्रॉनिक करेंसी का इजाद कुछ लोगों ने यह सोच कर किया था कि सरकार द्वारा बनाई गई करेंसी के अतिरिक्त लेन-देन का कोई दूसरा माध्यम बनाया जाये। लेकिन रिजर्व बैंक के प्रतिबंध से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार के ऊपर होकर नहीं चला जा सकता है।

पहले यह समझें कि इलेक्ट्रॉनिक करेंसी क्या है? मान लीजिये एक कमरे के अन्दर 100 सुडोकु के खिलाड़ी अलग-अलग क्यूबिकल में बैठ जाते हैं और किसी सुडोकु को हल करने का प्रयास करते हैं। जो खिलाड़ी सबसे पहले सुडोकु को हल करता है वह घोषित करता है और बाकी सभी 99 स्वीकार करते हैं कि उसने सबसे पहले उस सुडोकु को हल किया। ये 99 उसे एक बिटकॉइन  इनाम स्वरूप दे देते हैं। यह बिटकॉइन सभी 100 खिलाड़ियों द्वारा सम्मिलित रूप से दिया जाता है और इसे उन सभी की मान्यता होती है। वे आपस में लेन-देन के लिए इस बिटकॉइन  का उपयोग कर सकते हैं। एक सुडोकु हल हो जाने के बाद सभी खिलाड़ी इसमें एक नई लाइन या कुछ परिवर्तन करके और कठिन सुडोकु बनाते हैं। इस नये सुडोकु की फिर से प्रतियोगिता चालू होती है और जो खिलाड़ी इस नये सुडोकु को सबसे पहले हल कर दे उसे पुन: इनाम स्वरूप एक बिटकॉइन  दे दिया जाता है। इस प्रकार एक नई करेंसी प्रचलन में आ जाती है।

इसी प्रकार कम्प्यूटरों के खिलाड़ियों द्वारा बिटकॉइन  बनाया जाता है। शुरू में दस कम्प्यूटरों ने कोई पहेली बनाई और एक सुपर कम्प्यूटर ने इस पहेली को आपस में जोड़ करके सबसे जादा कठिन पहेली बनाई। फिर दस कम्प्यूटर चालकों ने इस कठिन पहेली को हल करने का प्रयास शुरू किया। इन दस कम्प्यूटर चालकों में से जिसने सबसे पहले उस पहेली को हल किया, उसने शेष सभी कम्प्यूटरों को सूचित किया कि मैंने पहेली को हल कर लिया है। शेष कम्प्यूटरों ने उसके द्वारा दिये गये हल को जांचा और सबने पाया कि हां यह पहेली वास्तव में हल हो गई है।

सबने अपनी स्वीकृति दे दी। सब कम्प्यूटरों द्वारा इस विजेता कम्प्यूटर को एक बिटकॉइन  इनाम स्वरूप दे दिया गया। इसके बाद सभी खिलाड़ियों ने उस पहेली में कुछ परिवर्तन करके एक और जटिल पहेली बनाई। एक सुपर कम्प्यूटर ने इन सब सुझावों को जोड़ करके एक विशेष जटिल पहेली बनाई जिसको पुन: सब कम्प्यूटरों को हल करने के लिए दिया गया। दूसरे चक्र में जिस कम्प्यूटर ने इस पहेली को हल किया उसे विजेता घोषित किया गया और उसे पुन: एक बिटकॉइन  दिया गया। कम्प्यूटरों के इस जाल में बहुत सारे कम्प्यूटर जुड़ गये हैं और यह एक प्रकार का वैश्विक खेल बन गया है। इस खेल की विशेषता यह है कि चुनौती को हल करने के लिए बड़े-बड़े कम्प्यूटर लगाये गये हैं जिससे कि पहेली को शीघ्रातिशीघ्र हल किया जा सके। तिब्बत में बिजली का दाम कम होने से कई कम्प्यूटर खिलाड़ियों ने वहां बड़े-बड़े दफ्तर बनाये हैं जहां इन पहेलियों को बनाया और हल किया जाता है और बिटकॉइन  का उत्पादन होता है जिसे बिटकॉइन  का खनन कहते हैं। 

स्पष्ट होगा कि सुडोकु के विजेता द्वारा जीता गया बिटकॉइन  अथवा कम्प्यूटरों द्वारा बनाया गया बिटकॉइन  की मान्यता इस बात पर टिकी है कि बाकी सब खिलाड़ी उस बिटकॉइन  को स्वीकार करेंगे। जैसे आपके पड़ोस में यदि 100 लोग बैठ के सुडोकु की पहेली बना ले और हल कर लें और किसी को बिटकॉइन  इनाम स्वरूप दे दें तो आपके लिये जरूरी नहीं है कि आप उस बिटकॉइन  को मान्यता दें। लेकिन तमाम ऐसे लोग हैं जो इन बिटकॉइन  को मान्यता देने को तैयार हैं और वे नकद पेमेंट करके बिटकॉइन  खरीदते भी हैं। इस नकद पेमेंट करने से बिटकॉइन का रूप मुद्रा जैसा हो जाता है। बिटकॉइन  उसी प्रकार है जैसे किसी ओलम्पिक मेडल को कोई व्यक्ति लाखों रुपये देकर खरीदने को तैयार हो सकते हैं।

इसी प्रकार कुछ लोग बिटकॉइन खरीदने को तैयार हो जाते हैं। जिस प्रकार हम डालर या रुपये में लेन-देन करते हैं उसी प्रकार हम बिटकॉइन  का उपयोग भी लेन-देन के लिये कर सकते हैं।  बिटकॉइन  की मुद्रा, सोने अथवा सरकार द्वारा जारी नोट की तरह नहीं है। सोने की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि स्वर्ण मुद्रा में जो सोना है उसकी अपनी कितनी कीमत है, जैसे पांच ग्राम सोने की मुद्रा का दाम कम होता है और दस ग्राम सोने की मुद्रा का दाम ज्यादा होता है। सरकार द्वारा जारी किये गये नोट की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार की मान्यता कितनी है। जैसे आपके नोट पर रिजर्व बैंक के गवर्नर लिखते हैं कि मैं नोट धारक को अमुक रकम अदा करूंगा। यानि कि आपके हाथ में जो नोट है उसकी कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि रिजर्व बैंक उस नोट के बदले आपको अमुक माल या मुद्रा देने को तैयार है। बिटकॉइन  का चरित्र ऐसा नहीं है। न तो इसके पीछे सोने जैसी कोई धातु है न ही इसके पीछे सर्वमान्य रिजर्व बैंक जैसी कोई अधिकृत संस्था है। जैसे आपके घर में दस आदमी आपस में मिलकर कुछ निर्णय कर लें तो उसकी सामाजिक मान्यता नहीं होती है। इसलिये बिटकॉइन  टिकाऊ नहीं है। 

बिटकॉइन  में दूसरी समस्या यह है कि जैसे एक कमरे में सौ खिलाड़ी बैठ कर सुडोकु की पहेली को हल करते हैं, वैसे ही दूसरे कमरे में दूसरे 100 खिलाड़ी सुडोकु हल कर सकते हैं और तीसरे कमरे में तीसरे। इस प्रकार तमाम इलेक्ट्रॉनिक करेंसियां चालू हो गई हैं जिसमें बिटकॉइन  प्रमुख हैं। दूसरी करेंसी हैं ऐथेरियन, लाइटकायन, डैश, न्यू, इत्यादि। इलेक्ट्रॉनिक करेंसी के पीछे कोई अधिकृत संस्था नहीं होती इसलिये इसकी कीमत पानी पर बह रहे तेल जैसी है इसमें कोई गहराई नहीं होती है।

सामाजिक दृष्टि से भी बिटकॉइन  हानिप्रद है। बड़े कम्प्यूटरों में भारी मात्रा में बिजली की बर्बादी केवल एक आटिफिशियल पहेली को हल करने में लगाई जाती है। जैसे हमने एक कागज पर लाइन बनाई फिर मिटाई फिर लाइन बनाई फिर मिटाई। हमने इस लाइन को बनाने और मिटाने में आनन्द पाया। इसी प्रकार बिटकॉइन  की पहेली बनाने और हल करने में लोग आनन्द प्राप्त करते हैं। इसे बौद्धिक विलासिता कहा जा सकता है। इसका सामाजिक दुष्प्रभाव यह है कि इसमें बिजली और संसार के प्राकृतिक संसाधनों की भयंकर बर्बादी हो रही है। अत: रिजर्व बैंक द्वारा बिटकॉइन  पर प्रतिबन्ध लगाना सही है और इसको आगे बढ़ाना चाहिये। 
 

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