By: Sabkikhabar
16-01-2018 07:27

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई अदालत के जज ब्रजगोपाल लोया की आकस्मिक मौत फिलहाल एक पहेली बनी हुई है। लेकिन उनके बेटे अनुज लोया रविवार को मीडिया के सामने आए और कहा कि पिता की मौत को लेकर उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं है और उनके परिवार का किसी पर आरोप नहीं है। अनुज ने ये भी कहा कि वो इसे लेकर किसी तरह की जांच नहीं चाहते हैं। 21 बरस के अनुज ने कहा, कि पिछले कुछ दिनों से आ रहीं मीडिया रिपोर्टों को देखते हुए मैं ये साफ करना चाहता हूं कि परिवार को इन सब चीजों को लेकर बहुत तकलीफ हो रही है। हमारा किसी पर कोई आरोप नहीं है। हम काफी दर्द में हैं और इन सब चीजों से बाहर आना चाहते हैं। मैं आप लोगों से अनुरोध करता हूं कि कृपया हमें परेशान करने की कोशिश नहीं कीजिए।

मैं मीडिया के जरिए ये बात सभी तक पहुंचाना चाहता हूं। जब अनुज से सवाल किया गया कि उनके नाम से सोशल मीडिया में एक पत्र जारी हुआ था, क्या वो पत्र उन्होंने लिखा था, क्योंकि वो उनके मौजूदा रुख के विपरीत है तो अनुज ने कहा, जैसा मैने कहा, वो भावनात्मक उलझन का दौर था। उस समय संदेह थे लेकिन अब स्थिति साफ है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ मौजूद वकील अमीर नाइक ने कहा कि परिवार नहीं चाहता कि इस मामले पर राजनीति हो और किसी को इसका फायदा हो।

बात बिल्कुल सही है कि किसी की भी मौत पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, न किसी को इसका फायदा उठाने देना चाहिए। लेकिन मौत अगर संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई हो, तो उसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है ताकि यह पता लग सके कि मौत कैसे हुई। अभी अनुज लोया यह मान रहे हैं कि उन्हें अपने पिता की मौत के कारणों पर कोई संदेह नहीं है। लेकिन फरवरी 2015 में उनके हस्ताक्षर वाला एक पत्र सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने पिता की मौत की जांच करवाने की मांग महाराष्ट्र के मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह से करने का उल्लेख किया है। इस पत्र में उन्होंने आशंका जतलाई है कि ये राजनेता उन्हें और उनके परिवार को कुछ नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह पत्र हाथ से लिखा हुआ है। जबकि दिसंबर 2017 में एक टाइप किया हुआ पत्र, अनुज लोया के ही हस्ताक्षर से सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्हें अपने पिता की मौत पर कोई संदेह नहीं है। उनकी मृत्यु के वक्त वे भावनात्मक रूप से परेशान थे और लोगों ने उनके दिमाग में संदेह पैदा कर दिया था। लेकिन सही तथ्यों को जानने के बाद उन्हें पता चला कि उनके पिता की मौत हार्ट अटैक से हुई।  

रविवार की प्रेस वार्ता में भी अनुज ने दिसंबर 2017 के पत्र जैसी बातें ही कही हैं। हालांकि उनके दोनों पत्रों में जो विरोधाभास है, वह किस कारण से है, इसका खुलासा होने की भी जरूरत है। दोनों पत्रों में अनुज के हस्ताक्षरों में फर्क है, उसकी बुनावट एक समान है, लेकिन दो अलग-अलग कोणों से ये किए गए हैं। इसलिए इन पत्रों की सत्यता परखनी भी जरूरी है। मान लें कि जज लोया की मौत हार्ट अटैक से ही हुई है और उसके पीछे कोई साजिश नहींहै, तो यह खुलासा जांच के बाद हो ही जाएगा। और अगर उसके पीछे कोई गहरी साजिश है, जैसा अंदेशा पहले जतलाया गया है तो उसका पता लगना भी बेहद जरूरी है। दिवंगत जज लोया के परिजनों को पूरा हक है कि वे उनकी मौत पर अपनी राय प्रकट करें।

 
लेकिन वे कोई सामान्य नागरिक नहीं थे कि उनके जिंदा रहने या मृत्यु होने से परिजनों के अलावा किसी को कोई फर्क न पड़े। वे उस सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई करने वाले जज थे, जिस पर कई बड़े राजनीतिक खेल हो गए और शायद आगे भी होते रहें। उनके कार्यरत होने के दौरान आकस्मिक मृत्यु हुई, इसलिए भी जांच का आधार बनता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार से जवाब तलब किया है और चूंकि मामला न्यायाधीन है, इसलिए इस पर निजी राय का खास अर्थ नहीं रहता। लेकिन अनुज लोया को इस तरह प्रेस कांफ्रेंस क्यों करनी पड़ी?

उन्हें अपने पिता की मौत के कारणों पर पहले संदेह क्यों हुआ और वे कौन से तथ्य थे, जिनसे उन्हें मौत के कारणों की सच्चाई पता लगी? वे कौन राजनेता हैं, जिनसे उन्हें खतरा था? इन सब का खुलासा होना चाहिए। अन्यथा व्यापमं की तरह यह मामला भी रहस्यों के जाल में उलझ कर रह जाएगा। 
 

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