By: Sabkikhabar
13-03-2018 07:31

भोपाल। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) भोपाल में साफ-सफाई स्टाफ के व्यवहार व अन्य सुविधाओं को लेकर 21 फीसदी मरीज संतुष्ट नहीं हैं। रजिस्ट्रेशन के दौरान मरीजों की ओर से दर्ज कराए गए मोबाइल नंबर पर फीडबैक लेने पर यह खुलासा हुआ है। 2016-17 में अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों से यह फीडबैक लिया गया था।

एम्स में व्यवस्थाओं में सुधार के लिए मरीजों से फीडबैक लिया जा रहा है। 2016-17 में करीब छह हजार मरीजों से फीडबैक लिया गया। इसमें 32 फीसदी मरीजों ने कहा है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं से 'बेहद संतुष्ट' हैं। 47 फीसदी 'संतुष्ट' हैं। बाकी 21 फीसदी ने असंतुष्टि जाहिर की है। असंतुष्ट मरीजों में 28 फीसदी स्टाफ के व्यवहार से, 9 फीसदी साफ-सफाई से, 15 फीसदी इलाज पर होने वाले खर्च से 16 फीसदी इलाज की क्वालिटी व बाकी अन्य कारणों से असंतुष्ट हैं।

एम्स के अधिकारियों ने बताया कि अभी भी मरीजों से फीडबैक लिया जा रहा है। हर महीने की रिपोर्ट विभागों को दी जाती हैं। वे अपनी रिपोर्ट देखकर उसमें सुधार करते हैं।

साफ-सफाई को लेकर कितने असंतुष्ट

मरीजों के पंजीयन व वेटिंग एरिया को लेकर 16 फीसदी, वार्डों में सफाई को लेकर 16 फीसदी, शौचालय में सफाई को लेकर 47 फीसदी, बेडशीट की सफाई को लेकर 9 व अन्य जगह की सफाई को लेकर 11 फीसदी मरीज संतुष्ट नहीं हैं।

किसके व्यवहार से कितना असंतुष्ट हैं मरीज

स्टाफ के व्यवहार से असंतुष्ट 261 मरीजों में सबसे ज्यादा 42 फीसदी मरीज वार्डबाय व निचले दर्जे के अन्य स्टाफ से असंतुष्ट हैं। 34 फीसदी मरीजों ने डॉक्टरों के व्यवहार पर नाखुशी जाहिर की है। नर्स के व्यवहार से 10 फीसदी व टेक्नीशियन्स के स्वभाव से 9 फीसदी मरीज संतुष्ट नहीं है।

... तो जेपी और हमीदिया में इससे कई गुना ज्यादा होंगे असंतुष्ट

राष्ट्रीय स्तर का संस्थान होने के बाद भी एम्स में 21 फीसदी मरीजों ने असंतुष्टि जताई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है शहर के दूसरे बड़े अस्पताल जेपी, हमीदिया और बीएमएचआरसी में मरीजों का फीडबैक लिया जाए तो क्या स्थिति होगी। वजह, इन अस्पतालों में सुविधाओं की कमी है। हमीदिया अस्पताल में मरीजों को हर जगह लंबी कतार में लगना पड़ता है। मरीजों के साथ हर साल 13 से 14 मारपीट की घटनाएं होती हैं।

सिर्फ कागजों में रह गया सरकारी अस्पतालों में फीडबैक लेने का निर्देश

तीन साल पहले जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी मरीजों से फीडबैक लेने के निर्देश स्वास्थ्य संचालनालय ने जारी किए थे। ओपीडी में आने वाले मरीजों में 10 फीसदी व भर्ती मरीजों में 5 फीसदी से फीडबैक लिया जाना, लेकिन एक-दो महीने बाद ही यह व्यवस्था बंद कर दी गई। दरअसल, मरीजों का फीडबैक लेने से अस्पताल में व्यवस्थाओं की पोल खुल सकती है। लिहाजा यह व्यवस्था धीरे-धीरे बंद कर दी गई।

इनका कहना है

ज्यादातर मरीज संतुष्ट हैं। अस्पताल पूरी तरह से शुरू होने के बाद इलाज में लगने वाला समय भी कम हो जाएगा। मरीजों के सुझाव से हमें अपनी कमियां पता चलती हैं और उन्हें दूर करते हैं, इसलिए फीडबैक लिया जा रहा है - डॉ. नितिन एम नागरकर डायरेक्टर, एम्स भोपाल
 

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