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 ट्रंप ने छेड़ दिया ट्रेड वार, भारत को दी ‘जवाबी कर’ लगाने की धमकी

By Sabkikhabar :10-03-2018 06:34


नई दिल्ली : संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार अमेरिका में स्टील पर 25 फीसद और एल्यूमीनियम पर 10 फीसद आयात शुल्क लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर कर ग्लोबल ट्रेड वार की औपचारिक शुरुआत कर दी। कनाडा और मैक्सिको को नए कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। अमेरिका ने भारत और चीन समेत अन्य देशों को यह भी धमकी दी है कि अगर किसी ने अमेरिकी कदम का जवाब देने की जुर्रत की, तो उस पर ‘वास्तविक कर’ यानी उस देश में अमेरिकी स्टील उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क के बराबर शुल्क लगाया जाएगा।

इसलिए उठाया ट्रंप ने कदम: ट्रंप ने कहा है कि घरेलू उद्योग जगत कई वर्षो से ‘अनुचित’ कारोबारी गतिविधियों का सामना कर रहा है और उसे बचाने के लिए यह कदम जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘अगर स्टील नहीं होगा, तो देश नहीं बचेगा। वर्षो से हमारे उद्योगों को निशाना बनाया जाता रहा है। हमें अपने उद्योगों को बचाना होगा।’
अमेरिका की तिलमिलाहट: वर्तमान में दुनियाभर से अमेरिका को किए जा रहे स्टील और एल्यूमीनियम निर्यात पर अमेरिका में नाम मात्र को आयात शुल्क लगता है, जिसकी मात्र ज्यादातर मामलों में पांच फीसद से भी कम है। दूसरी तरफ भारत, चीन और कई अन्य देशों में अमेरिकी स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादों पर 75 फीसद तक आयात शुल्क लगाए जा रहे हैं।

जवाबी कर की चेतावनी: अमेरिका ने कहा है कि भारत ने अमेरिकी हार्ले डेविडसन बाइक पर 50 फीसद आयात शुल्क लगाया, तो अमेरिका भी भारत से आयातित बाइक पर आयात शुल्क बढ़ाकर 50 फीसद कर देगा, जो अभी फ्री है। अमेरिका से आयातित कारों पर चीन 25 फीसद टैक्स लगाता रहा है, जबकि अमेरिका सिर्फ 2.5 फीसद आयात शुल्क लगाता है।

भारत और चीन को अमेरिका की खुली धमकी: स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादों पर आयात शुल्क लगाने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) ने भारत और चीन को खुली धमकी दी है। ट्रंप ने कहा, ‘आने वाले दिनों में हम रेसिप्रोकल टैक्स यानी ‘जवाबी कर’ पर काम करेंगे। मेरे प्रशासन के पहले वर्ष में जवाबी कर का मंच सज चुका है। ऐसा नहीं होगा कि भारत या चीन हमारे उत्पादों पर 75 या 25 फीसद आयात शुल्क लगाएं और हम उनके सामान मुफ्त में आने दें। अगर वे हम पर 75 फीसद शुल्क लगाएंगे, तो हम भी उतना ही शुल्क लगाएंगे।’


आयात शुल्क बढ़ाने वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के वक्त ट्रंप ने कई बार चीन का नाम लेते हुए कहा कि हालांकि चीन के साथ अमेरिका बेहद मधुर रिश्तों की राह पर है। ट्रंप ने कहा, ‘लेकिन अमेरिका हर वर्ष चीन के हाथों पांच अरब डॉलर (करीब 32,500 करोड़ रुपये) का कारोबार गंवा रहा है। हमें कुछ करना होगा।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चीन से उनकी बातचीत चल रही है, लेकिन हमें अपनी राजकोषीय स्थिति मजबूत करनी होगी।

घट सकता है इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट: इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन रवि सहगल ने कहा कि अमेरिका के इस फैसले के खिलाफ यूरोप व चीन जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। इससे भारत से इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को धक्का लगेगा। सहगल ने कहा, ‘प्रत्यक्ष रूप से न सही, लेकिन परोक्ष रूप से निर्यात को झटका लग सकता है। अमेरिकी फैसले से इंजीनियरिंग उत्पादों के दाम अस्थिर हो जाएंगे।

भारत कर रहा मूल्यांकन: वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले का सरकार मूल्यांकन कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार अंतिम अमेरिकी आदेश का अवलोकन करने के बाद ही अपनी रणनीति को अंतिम रूप देगी। तेवतिया ने कहा, ‘अमेरिका ने कुछ उत्पादों पर शुल्क की सीमा विश्व व्यापार संगठन में अपनी ही प्रतिबद्धता से ज्यादा बढ़ा दी है और यह चिंता का विषय है।
 

Source:Agency