By: Sabkikhabar
08-01-2018 05:59

अंग्रेजी शिक्षा संस्कृति हर हमला कर रही है और हमारे देश के नौनिहालों को देश के खिलाफ भड़का रही है, यह सोचते हुए ईरान ने अपने यहां इस विदेशी भाषा को पढ़ाए जाने पर रोक लगा दी है.

ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए वहां की सरकार डर गई है, और अपने स्तर पर आगे ऐसा न हो इसलिए उसने स्कूलों में अंगेजी पढ़ाने पर रोक लगा दिया है.

इस्लामिक नेताओं ने किया था विरोध

यह फैसला उस समय आया जब कई इस्लामिक नेताओं ने आगाह किया कि शुरुआती शिक्षा के दौरान अंग्रेजी भाषा पढ़ाए जाने से उनके देश में पाश्चात्य "सांस्कृतिक घुसपैठ" हो रहा है. ईरान के एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस्लामिक नेताओं के इस बयान के बाद प्राइमरी स्तर पर अंग्रेजी पढ़ाने जाने पर रोक लगा दी गई है.

उच्च स्तरीय शिक्षा समिति के प्रमुख मेहदी नाविद-अधम ने कहा, "सरकारी या गैर-सरकारी स्कूलों के आधिकारिक पाठ्यक्रम में अंग्रेजी पढ़ाया जाना अब नियम के खिलाफ होगा. प्राइमरी स्तर पर ऐसी शिक्षा दिए जाने से शुरुआती स्तर पर छात्र ईरानी संस्कृति को दूर होते जाएंगे."

ईरान के स्कूलों में अभी तक अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत 12 से 14 साल के बीच हुआ करती थी, लेकिन कुछ प्राइमरी स्कूल बेहद कम उम्र में ही अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत कर देते थे. मिडिल स्कूल के कुछ बच्चे अपने स्कूल में पढ़ाई करने के बाद किसी निजी भाषा संस्थान में अंग्रेजी की पढ़ाई किया करते थे, जबकि संपन्न घरों के ज्यादातर बच्चे गैर-सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा हासिल किया करते थे.

'संस्कृति पर हमला'

ईरान के इस्लामिक नेता लगातार अंग्रेजी शिक्षा को ईरान की संस्कृति पर हमला बताते रहे हैं. और शीर्ष नेता अयातुल्लाह अली खमैनी भी 2016 में नर्सरी स्कूलों में बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा दिए जाने के बढ़ते क्रेज पर नाराजगी जता चुके हैं.

हालांकि यह साफ नहीं हो सका है कि इस फैसले के पीछे ईरान में धार्मिक नेताओं और सरकार के खिलाफ पिछले एक हफ्ते से जारी विरोध-प्रदर्शन जिम्मेदार हैं या नहीं. ईरान के रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स की ओर से कहा गया कि देश में अशांति के लिए विदेशी शक्तियां जिम्मेदार हैं.

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हाल में जारी विरोध-प्रदर्शनों में 22 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 80 जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में फैल चुके प्रदर्शन पर अंकुश लगाने के लिए 1 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. माना जा रहा है कि ईरान में हजारों युवा और कामकाजी लोग बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई के अलावा अमीर-गरीब में बढ़ती खाई के कारण सड़कों पर उतरे हैं.

ईरान का दावा है कि उसके देश में हो रहे प्रदर्शन के पीछे अमेरिका, ब्रिटेनस इजराइल, सऊदी अरब जैसे देशों का हाथ है. ऐसे प्रदर्शनों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने पॉपुलर इंस्ट्राग्राम और टेलीग्राम जैसी सोशल मीडिया साइटों पर रोक लगा दी है. हालांकि फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर 2009 से ही बैन लगा हुआ है.

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