By: Sabkikhabar
12-10-2017 07:07

नागपुर....  इस बाघिन की कहानी हैरान कर देने वाली है। इस बाघिन का एक शिकारी लगातार पीछा करता रहा। इस शिकारी को सख्त आदेश था कि यदि बाघिन हिंसक हो जाए तो उसे उसी वक्त गोली मार दिया जाए। अपने सफर में बाघिन ने दो इंसानों सहित एक-दो मवेशियों का शिकार भी किया। ऐसे में उस पर जान का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद वह 500 किलोमीटर का सफर पूरा कर 'घर' लौट आई।

अब पशु प्रेमियों की तरफ से बॉम्बे हाई कोर्ट में बाघिन को मारने के खिलाफ याचिका दायर की गई है। हाई कोर्ट में इसकी बहस पूरी हो चुकी है। गुरुवार को कोर्ट का फैसला आने की उम्मीद है। बहस में कहा गया कि बाघिन ने इंसानों को मारा है। इसके बाद या तो उसे कैद में रखा जाए या फिर उसे गोली मार दी जाए।

बेहद दुर्गम था सफर
दरअसल इस बाघिन को 10 जुलाई को महाराष्ट्र में चंद्रुपर जिले के दक्षिणी ब्रह्मपुरी इलाके से पकड़ा गया था और उसे 29 जुलाई को हिंगानी जिले स्थित बोर टाइगर रिजर्व लाया गया, लेकिन वह वहां टिक नहीं पाई। जैसे ही बाघिन का बोर टाइगर रिजर्व से निकलने का पता चला, फॉरेस्टर्स की एक टीम उसके पीछे लग गई। इस टीम में एक कुशल शिकारी भी था। बाघिन के शरीर पर एक रेडियो कॉलर लगा था जो शिकारी को लगातार बाघिन का लोकेशन दे रहा था।


बोर टाइगर रिजर्व से ब्रह्मपुरी का सफर बाघिन ने यूं तय किया


बाघिन के लिए 500 किलोमीटर का सफर बेहद दुर्गम था। यह उसके करीब 76 दिनों में पूरा किया। इस रास्ते में कई मैदान, जंगल, पहाड़ियां, नदी-नाले, ऊंची घासों के बीच बने कई दलदल, तमाम सड़कें पड़ती हैं। हैरानी की बात यह है कि रास्ते में व्यस्त 4 लेन का एनएच 6 दो बार पार करना पड़ता है। बाघिन यह कठिन रास्ते पार करके ब्रह्मपुरी लौट आई।

इस सफर में भूख मिटाने के लिए बाघिन ने मवेशी, छोटे शिकार और दो व्यक्तियों को मारा। यह सब फॉरेस्टर्स की एक टीम जो बाघिन का पीछा कर रही थी, उन्होंने मॉनिटर किया। टीम में एक प्रशिक्षित शिकारी भी था जिसने बाघिन को मारने का आदेश दिया था।

इंसानों की जान को खतरा
बाघिन को 10 जुलाई को दक्षिणी ब्रह्मपुरी से पकड़ा गया था क्योंकि वहां उससे कई इंसानों की जान को खतरा था। उसे बोर के जंगलों में दूसरे बाघों के साथ 29 जुलाई को छोड़ दिया गया था। उम्मीद थी कि बाघिन दिए जाने वाले पशु खाएगी और जंगल को ही अपना घर बना लेगी। इससे इंसान की जान को खतरा नहीं होगा। कुछ दिनों बाद यह बाघिन बिना आराम किए बोर के नवरगांव विलेज से वापस आ गई।

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