By: Sabkikhabar
12-10-2017 04:44

रायपुर। लोग लिफ्ट लेने में शर्माते हैं, सोचते हैं कि क्या कहेंगे। कई लोग लेते भी हैं तो कुछ दूरी तक। किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि कोई लिफ्ट लेकर पूरा भारत घूम लेगा। यह अनोखा कारनामा कर दिखाया है इलाहाबाद नैनी के 28 वर्षीय अंश मिश्रा ने। उन्होंने मानवता का संदेश देने के लिए इलाहाबाद से यात्रा की शुरुआत की।

248 दिनों में वे बुधवार को राजधानी पहुंचे। प्रदेश घूमने के बाद उनकी यात्रा समाप्त हो जाएगी। उन्होंने इस बीच 1800 ट्रकों में लिफ्ट लिया। देश के 29 राज्यों, चार केंद्र शासित प्रदेशों के साथ म्यांमार, भूटान और बांग्लादेश के बॉर्डर भी घूम आए।

इस दौरान उन्होंने न एक रुपए खर्च किया और न ही अपने घर से पैसे लेकर निकले थे। जब वे एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव के लिए निकलते थे तो पता नहीं होता था कि आज खाना, लिफ्ट मिल पाएगा या नहीं।

तीन लक्ष्य लेकर निकले

अंश ने बताया- मेरे तीन लक्ष्य हैं। पहला, लोग सोचते हैं कि बिना पैसे के हम कहीं घूम नहीं सकते, लेकिन ऐसा किया जा सकता है। दूसरा, ट्रक ड्राइवर को लेकर व्याप्त धारणाओं को दूर करना। लोग ट्रक ड्राइवरों के बारे में गलत बातें कहते हैं, जबकि उनसे ही हमारी इकोनामी जुड़ी है। तीसरा, लोगों को बताना कि अपने लिए भी जीएं।

घरवालों को नहीं था पता

इस साल फरवरी में यात्रा शुरू की तो घर में किसी को जानकारी नहीं थी। सिर्फ भाई को बताया था। जब मां को बता चला तो वो बहुत परेशान थीं, लेकिन मेरे लक्ष्य को जानकर उन्हें अच्छा लगा। मुझे घर की याद आती थी तो किसी परिवार के पास रहने की कोशिश करता था।

छोड़ दी जॉब

उन्होंने बताया-बचपन से ही ट्रैवलिंग का शौक है। एमबीए के बाद गुड़गांव की एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब किया, पर मन नहीं लगा तो छोड़ दी। फिर खुद का कैंपस रिक्रूटमेंट का काम इस साल जनवरी में किया।

एक वक्त आया, जब वापस लौटने की सोचा

नेडूमंगलम से 44 किमी दूर एक शहर में मंदिर, चर्च और मस्जिद में रहने की जगह नहीं मिली। लोग न हिंदी जानते थे न अंग्रेजी। तब परेशान हो गया, सोचा कि अब लौट जाऊं। तभी मंदिर से एक लड़का आया, जिससे बात के दौरान मेरे दोस्त का कॉल आया नेडूमंगलम से। दोनों ने एक-दूसरे से बात की।

फिर उसने अपनी स्कूटी से 22 किमी दूर अपने घर ले गया। वहां उसका पूरा परिवार इंतजार कर रहा था। महाराष्ट्र के अकोला में चिकनपॉक्स के कारण डॉक्टर ने कहा कि डेढ़ महीने तक रेस्ट करना होगा। मैं सोच रहा था कि सेहत है तो सब है, लेकिन नौवें दिन ही यात्रा पर आगे निकल गया।

पुलिस ने तान दी थी बंदूक

केरल के मानथवाड़ी एरिया पहुंचा तो काफी बारिश हो रही थी। घंटेभर लिफ्ट नहीं मिली। पीछे खड़ा पुलिसकर्मी बहुत देर से देख रहा था। हाथ में मेरा ट्राइपोर्ट था, जिसे उन्होंने बंदूक समझा और पीछे से आकर मुझ पर बंदूक तान दी। लेकिन ट्राइपोर्ट देख कर हंस पड़े। उन्हें न तो हिन्दी आती थी और न अंग्रेजी। कुछ समझ नहीं सके और थाने ले गए। वहां अधिकारी से बात हुई तब उन्होंने मुझे पुलिस वैन में 22 किमी तक ड्रॉप करवाया।
 

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