By: Sabkikhabar
11-10-2017 08:25

सांता रोजा। अमेरिका के उत्तरी कैलिफोर्निया के जंगलों में सोमवार को फिर भीषण आग लग गई है। तेज हवाओं के चलते आग तेजी से फैलती जा रही है। आग इतनी भयानक है कि डिज्नीलैंड के कैलिफोर्निया एडवेंचर पार्क के ऊपर का आसमान नारंगी रंग का हो गया।
आग से अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 1500 से अधिक मकान खाक हो चुके हैं। करीब 20 हजार लोगों को पलायन करना पड़ा है। कई लोग लापता हैं। मृतकों में 99 और 100 साल का एक दंपती भी शामिल है। 100 से अधिक लोग घायल हैं।
प्रांत में आग लगने की बीते एक दशक की यह सबसे भयावह घटना बताई जा रही है। कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट्री एंड प्रोटेक्शन के मुताबिक, इस साल जंगलों में आग के 7,484 मामले सामने आए, जिसमें 7.71 एकड़ इलाका जल गया। पांच काउंटी में आपात स्थिति की घोषणा कैलिफोर्निया के गवर्नर जेरी ब्राउन ने वाइन, नेपा, सोनोमा, यूबा और ऑरेंज काउंटी में आपात स्थिति की घोषणा कर दी है।
उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से राहत और बचाव कार्य में मदद का आग्रह किया है। कैलिफोर्निया के वन विभाग के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान सांता रोजा में हुआ है। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लपटों को अंतरिक्ष से भी देखा गया है।
नेशनल ओशनिक एंड एटमॉसफेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने सैटेलाइट से आग देखे जाने की सूचना दी। कैलिफोर्निया में अग्निशमन विभाग के प्रवक्ता डेनियल बर्लेंट के अनुसार, उत्तरी कैलिफोर्निया के जंगलों में रविवार देर रात आग भड़की। इस दौरान 80 किमी घंटे की गति से चल रहीं तेज हवाओं के चलते आग 73 हजार एकड़ के दायरे में फैल गई। इसे बुझाने के लिए सैकड़ों दमकलकर्मी सोमवार को जूझते रहे। सोनोमा काउंटी के दो अस्पतालों को भी खाली कराना पड़ा है।
दुनिया का एकमात्र विमान 747 सुपर टैंकर बुझा सकता है आग
कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग को दुनिया का एकमात्र विमान 747 सुपर टैंकर ही बुझा सकता है। यह एक बार में 75 हजार लीटर से अधिक (20 हजार गैलन) पानी गिरा सकता है। कैलिफोर्निया प्रशासन इस विमान की मदद से आग से निपटने की कोशिश कर रहा है।
सोमवार को इसने आग के ऊपर छह चक्कर लगाकर पानी गिराया। दिलचस्प बात यह है कि सुपर टैंकर को जेल, फोम और पानी से महज 30 मिनट में भरा जा सकता है और यह 600 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है।
इसलिए अक्सर लगती है आग
कैलिफोर्निया के दक्षिणी तट से चलने वाली अत्यधिक सूखी हवा के कारण यहां अक्सर आग लगती है। यह सूखी हवा अत्यधिक गर्म होती है। इसी से सूखे जंगलों में आग लग जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा की रफ्तार तेज होने पर घर्षण से निकली हर चिंगारी शोला बन जाती है।
 
 

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