By: Sabkikhabar
11-10-2017 04:33

रायपुर। तमाम तामझाम के बाद भी आदिवासी इलाकों में नौनिहाल स्कूलों से तौबा कर रहे हैं। गवाह हैं, लोक शिक्षण संचालनालय से मिले आंकड़े। खासकर, माओवाद प्रभावित जिलों के आंकड़े देखें तो यहां प्राइमरी यानी पहली से लेकर पांचवीं तक के बच्चों के स्कूल छोड़ने का प्रतिशत कुछ जिलों में 27 फीसदी तक पहुंच गया है, जबकि अन्य इलाकों में मिडिल कक्षा के बच्चे ज्यादा संख्या में पढ़ाई छोड़ रहे हैं।

प्राइमरी में स्कूल छोड़ने की संख्या के मामले में बीजापुर में सर्वाधिक 20 से 27 प्रतिशत है, जबकि मिडिल स्कूल के मामले में कवर्धा में सबसे अधिक बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं। मामले में लोक शिक्षण विभाग के संचालक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर शिक्षक सूचकांक की जानकारी दी। साथ ही ड्रॉपआउट की संख्या कम करने की हिदायत दी है।

रायपुर-दुर्ग की स्थिति बेहतर

दूसरे जिलों की तुलना में रायपुर और दुर्ग जिले की स्थिति ड्रॉपआउट में बेहतर है। रायपुर में प्राइमरी के बच्चे जहां 3 से 10 प्रतिशत तो मिडिल के बच्चे 11.21 प्रतिशत ड्रॉपआउट हो रहे हैं। दुर्ग में प्राइमरी के बच्चे 0 से 5 और मिडिल में 13.63 प्रतिशत हैं। एससीईआरटी के मुताबिक इन इलाकों में बच्चों के आजीविका के लिए काम पर लगना स्कूल छोड़ने की बड़ी वजह है।

इस तरह हर साल बच्चों ने छोड़ा स्कूल

सर्व शिक्षा अभियान से मिले आंकड़ों के मुताबिक 2010 में 1 लाख 28 हजार 185, 2011 में 64 हजार 860, 2012 में 76 हजार 204, 2013 में 57 हजार, 2014 में 53 हजार, 2015 में 49 हजार और 2016 में 52 हजार बच्चों ने स्कूल छोड़ा है।

जिला प्राइमरी में ड्रापआउट प्रतिशत मिडिल में ड्रॉपआउट

कर्वा 3 से 23 27.3

बालोद 2 से 5 5.90

बलौदाबाजार 4 से 14 3.53

बेमेतरा 3 से 9 18.94

बिलासपुर 5 से 13 11.87

ये हैं माओवाद प्रभावित

बीजापुर 20 से 27 22.91

कोण्डागांव 19 से 26 9.17

बलरामपुर 11 से 23 11.58

बस्तर 11 से 18 8.19

एक्सपर्ट व्यू

चिंता करने की जरूरत

माओवादी इलाकों में यदि प्राइमरी के बच्चे ड्रॉपआउट अधिक हो रहे हैं तो यहां चिंता करने की जरूरत है। यहां के बच्चों के लिए पोटाकेबिन की स्कूल हैं। इसके बाद यह स्थिति ठीक नहीं है। बेहतर योजना बनाने की जरूरत है।

- गौतम बंधोपाध्याय, संयोजक, छत्तीसगढ़ शिक्षा अधिकार फोरम

असुरक्षा की भावना भी हो सकती है

माओवादी इलाकों में इस तरह के आंकड़ों से असुरक्षा की भावना भी हो सकती है। हो सकता है मां-बाप काम पर जाते हों तो अपने साथ बच्चों को ले जाते हों यह भी एक कारण हो सकता है ।

- डॉ. प्रियंबदा श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, पं. रविवि

माओवादी इलाकों में बच्चों के स्कूल छोड़ने की वजह सिर्फ सामाजिक कारण ही नहीं अन्य कारण भी हो सकते हैं। हमनें सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को ड्रापआउट दर कम करने के लिए कहा है। 

-एस. प्रकाश, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय
 

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