By: Sabkikhabar
11-10-2017 04:32

रायपुर। यह बिडंबना ही कही जाएगी कि सरप्लस वाले राज्य छत्तीसगढ़ में भी बिजली की किल्लत होने लगी है। अबके दिवाली पर भी मुश्किल पेश आ सकती है। मसलन, बत्ती गुल हो तो अचरज नहीं। क्योंकि, यहां राज्य बिजली उत्पादन कंपनी के कोरबा और मंडवा में स्थापित 3280 मेगावॉट क्षमता वाले प्लांटों में कोयले की कमी हो गई है।

प्लाटों में है कोयले की कमी

कोरबा और मंडवा में स्थापित प्लांटों में रोज करीब 29 हजार टन कोयले की जरूरत पड़ती है। हाल यह है कि पॉवर कंपनी के किसी भी प्लांट में कोयले का इतना स्टॉक नहीं है, जबकि सप्ताह भर का स्टॉक रखा जाता है। ऐसी स्थिति में यदि एक दिन भी कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा।

बिजली उत्पादन कंपनी के अफसर दावा जरूर कर रहे हैं कि कोयला संकट दूर करने की हर संभव कोशिश की जा रही है। लेकिन दीवाली त्योहार में बिजली की कमी खल सकती है। कंपनी के सूत्रों का कहना है कि कोयले को लेकर स्थिति अभी उतनी अच्छी नहीं है।

मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ रहा अंतर

राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। मंगलवार शाम पांच बजे राज्य में बिजली की मांग 3407 मेगावॉट और उत्पादन 2552 मेगावॉट था। इस अंतर को पूरा करने के लिए बिजली कंपनी को केंद्रीय कोटे से अपने हिस्से की बिजली ड्रा करनी पड़ रही थी। अफसरों के अनुसार इस वक्त राज्य में बिजली की मांग तीन हजार से 35 सौ मेगावॉट के बीच है। यह स्थिति दीवाली तक रहेगी।

ऊर्जा सचिव के कोरबा प्रवास के दौरान उठा था मामला

चार दिन पहले ऊर्जा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी के कोरबा प्रवास के दौरान बिजली कंपनियों में कोयला संकट का मामला उठा था। इस दौरान परदेशी ने कोल इंडिया के अफसरों से मोबाइल पर चर्चा की। कोल इंडिया के अफसरों ने कोयला की आपूर्ति करने का आश्वासन दिया था। बिजली कंपनी के अफसरों के अनुसार इसके बाद से कोयला नियमित मिल रहा है।

वार्षिक रखरखाव के लिए बंद होंगे प्लांट

बिजली उत्पादन यूनिटों के वार्षिक रख-रखाव की तैयारी चल रही है। सामान्यत मानसून के बाद एक-एक कर प्लांट का रख-रखाव किया जाता है। इस दौरान उत्पादन भी बारी- बारी से बंद किया जाता है। बिजली उत्पादन कंपनी के अफसरों को उम्मीद है कि इस दौरान कोयला का पर्याप्त स्टॉक एकत्र हो जाएगा।

उठा ही नहीं रहे हैं कोयला

साउथ ईर्स्टन कोल फील्ड लि.(एसईसीएल) के पास कोयला का भरपूर स्टाक है। कोल इंटक के महामंत्री पीके राय के अनुसार एनटीपीसी और राज्य की बिजली कंपनियों को गेवरा, दीपका और कुसमुंडा से कोयले की सप्लाई की जाती है। वहां कोयले का भरपूर स्टॉक पड़ा है, लेकिन कोई उठा ही नहीं रहा है। कोयले का यह संकट दरअसल उत्पादन की कमी के कारण नहीं बल्कि विवाद की वजह से है। राय के अनुसार कोयले के रेट और क्वालिटी को लेकर कुछ इश्यू है।

इनका कहना है

कोयले की स्थिति में धीरे धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन अभी पूरी तरह ठीक नहीं है। इसके बावजूद राज्य में बिजली उत्पादन को प्रभावित होने नहीं दिया जाएगा। बिजली को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।

ओसी कपिला, एमडी बिजली उत्पादन कंपनी
 

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