By: Sabkikhabar
12-08-2017 08:34

बिलासपुर। झीरम घाटी मामले में शुक्रवार को विशेष न्यायिक जांच आयोग के समक्ष स्व. महेंद्र कर्मा के पुत्र दीपक कर्मा ने कहा कि नक्सलियों के टारगेट में उनके पिता थे, दूसरे कांग्रेस नेता नहीं। इसके अलावा बताया कि घटना के बाद उन्हें दरभा थाने में रोक दिया गया था।ऐसे में वे और तीन कार्यकर्ता 108 एंबुलेंस में स्वास्थ्य कर्मी का वेश धारण कर घटना स्थल गए थे।

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा के सामने दीपक कर्मा का बयान दर्ज किया गया। इस दौरान सरकार के अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने देर से शपथ पत्र प्रस्तुत करने का कारण नहीं बताने पर आपत्ति की। इस पर गवाह दीपक कर्मा ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पीड़ित पक्ष होने के कारण आयोग या एनआईए पूछताछ के लिए बुलाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पिता के रायपुर स्थित घर से उनके पुराने निज सहायक ने सुरक्षा के लिए सीएम व सीएस को लिखा पत्र उपलब्ध कराया है। इस साक्ष्य के सामने आने से पिता को न्याय मिलने की उम्मीद है। दीपक कर्मा ने कहा कि पिता की मौत के बाद परिवार बिखर गया था।

इसके अलावा कुछ अन्य कारणों से शपथ पत्र देने में विलंब हुआ। उन्होंने बताया कि वे घटना के दिन सुबह से शाम 4 बजे तक सभा की तैयारी में केसलूर में थे। नक्सलियों के टारगेट में उनके पिता ही थे। परिवर्तन यात्रा में शामिल अन्य कांग्रेस नेता नहीं। उन्हें लगभग 4.30 बजे कांग्रेस के काफिले पर हमले की सूचना मिली।

उन्होंने पहले स्थानीय लोगों से पुष्टि का प्रयास किया। कोई जानकारी नहीं मिलने पर आईजी हिमांशु गुप्ता को फोन कर इसकी जानकारी दी। इस पर आईजी ने कहा था देखता हूं। इसके बाद वे कुछ कार्यकर्ताओं के साथ घटना स्थल के लिए रवाना हुए।

दरभा थाना के पास सिपाहियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया था। इसके बाद वे और तीन कार्यकर्ता जगदलपुर से आए एक 108 एंबुलेंस में स्वास्थ्य कर्मी का वेश धारणकर घटना स्थल में गए थे। यहां से घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया जा रहा था।

एक-दो महीने बिगड़ा रहा था बुलेट प्रूफ वाहन

गवाह ने कहा कि उनके पिता ने ग्रे कलर का नया बुलेट प्रूफ वाहन दिलाने पत्र लिखा था। बस्तर क्षेत्र में ग्रे व सिल्वर कलर की बोलेरो वाहन अधिक चलती है। इन वाहनों की पहचान आसानी से नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि बिगड़ने पर गाड़ी मरम्मत के लिए गैरेज भेजी जाती थी। कई बार गाड़ी एक दो महीने बाद मिलती थी। गवाह ने यह स्वीकार किया कि घटना दिन उनके पिता के पास बुलेट प्रूफ वाहन था।

तखतपुर में बना शपथ पत्र

सरकार के अधिवक्ता ने शपथ पत्र में तखतपुर की नोटरी का सील मोहर लगे होने पर आपत्ति की। उन्होंने पूछा कि आप ने शपथ पत्र कहा बनाया। इस पर दीपक कर्मा ने कहा कि अपने वकील के माध्यम से जगदलपुर में बनाया।

इस पर वकील ने 50 रुपए का स्टाम्प अनिल त्रिवेदी के मार्फत खरीदी करने के संबंध में सवाल किया। इस पर गवाह ने कहा कि मैं अनिल त्रिवेदी को नहीं जानता, लेकिन शपथ पत्र को जगदलपुर में पढ़कर हस्ताक्षर किया था।

मानिक मेहता का आवेदन खारिज

दिल्ली निवासी मानिक मेहता ने झीरम घाटी के संबंध में कुछ साक्ष्य प्रस्तुत किया था। एक सीडी में केंद्रीय जेल अंबिकापुर में बंद पूर्व नक्सली अभय सिंह की पत्रवार्ता की रिकार्डिंग थी। जिसमें उसने नक्सली व पुलिस के बीच साठगांठ और किसी बड़े नक्सली हमले की तैयार चलने की बात कही थी।

इस पर प्रकार इंदिरा प्रियदर्शिनी सहकारी बैंक घोटाले के आरोपी की नारको टेस्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की। आवेदन पर सुनवाई के बाद जस्टिस मिश्रा ने कहा कि आयोग को किसी मामले की जांच कराने का अधिकार नहीं है।
 

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