By: Sabkikhabar
12-08-2017 08:30

भारतीय जनता पार्टी का गठन 1980 में हुआ था। उसके गठन के 27 साल हो गए हैं और इस बीच वह देश की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी बन गई है। उसने देश की सबसे पुरानी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अब बहुत पीछे छोड़ दिया है। अब भारतीय जनता पार्टी की उपस्थिति देश के हर कोने में है। एक समय था जब भाजपा को हिन्दी प्रदेशों की पार्टी माना जाता था। इसे ब्राह्मण बनियों की पार्टी भी लोग कहते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। भारतीय जनता पार्टी को भौगोलिक विस्तार ही नहीं हुआ है, बल्कि सामाजिक विस्तार भी हुआ है। यह समाज के अधिकांश तबके में लोकप्रिय हो चुकी हैं। नरेन्द्र मोदी ने इस उन तबकों तक पहुंचा दिया है, जहां इसकी कोई पहुंच ही नहीं थी।

 

एक समय था जब भारतीय जनता पार्टी को राजनैतिक अछूत माना जाता था। लेकिन अब इसका बिल्कुल उलटा हो गया है। बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद भाजपा के साथ शिवसेना के अलावा कोई और पार्टी जुडऩा नहीं चाहती थी। लेकिन आज 33 पार्टियां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में उसकी सहयोगी हैं।

1996 में जब गठबंघन की राजनीति शुरू हुई, तो राजनैतिक पंडित कहने लगे कि देश दो मोर्चों की राजनीति की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में किसी एक पार्टी का बहुमत आना संभव नहीं है। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव मे यह भविष्यवाणी गलत साबित हो गई। 20 साल से चली आ रही गठबंधन की राजनीति का अंत हो गया।

2014 के बाद यूपीए लगातार कमजोर हो रहा है और एनडीए की ताकत बढ़ती जा रही है। लेकिन राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव के पहले यूपीए ने कुछ एकताबद्घ दिखने की कोशिश जरूर की। 17 पार्टियों ने मिलकर राष्ट्रपति का साझा उम्मीदवार घोषित किया, तो 18 पार्टियां उपराष्ट्रपति का साझा उम्मीदवार खड़ा करने के लिए एक हो गईं। हालांकि यह भी सच था कि उन उम्मीदवारों की जीत की कोई उम्मीद नहीं थी, क्योंकि एनडीए के पास अपने उम्मीदवारों का जिताने के लिए काफी वोट थे।

 
भारतीय जनता पार्टी का गठन 1980 में हुआ था। उसके गठन के 27 साल हो गए हैं और इस बीच वह देश की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी बन गई है। उसने देश की सबसे पुरानी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अब बहुत पीछे छोड़ दिया है। अब भारतीय जनता पार्टी की उपस्थिति देश के हर कोने में है। एक समय था जब भाजपा को हिन्दी प्रदेशों की पार्टी माना जाता था। इसे ब्राह्मण बनियोंं की पार्टी भी लोग कहते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।

भारतीय जनता पार्टी को भौगोलिक विस्तार ही नहीं हुआ है, बल्कि सामाजिक विस्तार भी हुआ है। यह समाज के अधिकांश तबके में लोकप्रिय हो चुकी हैं। नरेन्द्र मोदी ने इस उन तबकों तक पहुंचा दिया है, जहां इसकी कोई पहुंच ही नहीं थी।

एनडीए का गठन 1998 में हुआ था। जब इसकी सरकार उस समय बनी थी, तो इसमें 24 पार्टियां थी। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस विरोधी भावना को पूरी तरह भुनाया। जो पार्टियां घोर कांग्रेस विरोधी थीं, वे भाजपा के साथ आती गईं। इस तरह इसका विस्तार होता चला गया।

हालांकि 1999 में ही जयललिता के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया अन्ना डीएमके ने इससे समर्थन वापस ले लिया और यह लोकसभा मे ंएक वोट से गिर गई। पर मध्यावधि चुनाव के बाद एक बार फिर यह सत्ता में आ गई। 2004 में अतिविश्वास के कारण वाजपेयी सरकार ने समय से 6 महीना पहले ही लोकसभा का चुनाव करवा दिया और पार्टी चुनाव हार गई।

उसके बाद यूपीए की सरकार बनी। 10 साल तक इसका शासन रहा, पर 2014 में पाशा एक बार फिर भाजपा के पक्ष में पलटा। इस बार तो भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आ गई। उस समय भाजपा अपने गठबंधन में 26 सदस्य दलों के साथ शिरकत कर रही थी।

लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के सहयोगियों की संख्या बढ़ती ही गई। अभी अभी जनता दल (यू) ने उसके गठबंधन में प्रवेश किया है। कश्मीर की पीडीपी भी भाजपा की सहयोगी पार्टी बन गई है। तमिलनाडु की एआईएडीएमकेउ भी उसमें शामिल हो सकती है। केरल के घर्म सेना भी उसके साथ है। इस तरह से न केवल उसका अपना विस्तार हो रहा है, बल्कि उसके सहयोगियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। अनेक मामलों में तो उसका विस्तार उसके सहयोगियों की कीमत पर भी हो रहा है।
 

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