By: Sabkikhabar
19-06-2017 08:59
रायपुर। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बीच बन रहे नक्सलियों के नए जोन (राज्य) में सेंट्रल कमेटी के बड़े नक्सली नेताओं की आमद के भी संकेत मिले हैं। दिसंबर, 2016 में राजनांदगांव जिले में हुई एक मुठभेड़ के बाद पुलिस ने जो दस्तावेज बरामद किया है, उसमें पॉलिटिकल और इकॉनामिक वीकली पत्रिकाएं भी मिली हैं। नक्सलियों ने नए जोन का कमांडर सुरेंद्र को बनाया है, जो बस्तर के गोलापल्ली का रहने वाला बताया जा रहा है। नया जोन बनाने के लिए बस्तर से जो 58 नक्सली भेजे गए हैं, वे सभी वहां के स्थानीय हैं। ऐसे में अंगे्रजी की पत्रिकाएं मिलने से यह आशंका जताई जा रही है कि इस इलाके में नक्सलियों के बड़े लीडर भी डेरा जमा रहे हैं। दुर्ग आईजी दीपांशु काबरा का कहना है कि उस इलाके में नक्सलियों की रणनीति पर पुलिस का पूरा फोकस है। चुनौती से निपटने की तैयारी पहले से चल रही है। ज्ञात हो कि अप्रैल 2017 में एक मुठभेड़ के बाद पुलिस ने नक्सलियों का 25 पेज का एक दस्तावेज बरामद किया है। इससे पता चला है कि नक्सली छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, कवर्धा, मुंगेली, मध्यप्रदेश के बालाघाट और महाराष्ट्र के गोंदिया जिलों को जोड़कर एक नया जोन खड़ा कर रहे हैं। इस जोन को एमएमसी जोन कहा गया है। दस्तावेज में नक्सलियों ने कहा है कि हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए। हर छह महीने के लिए कम से कम 50 किलो गन पाउडर, 3 हजार पीस लोहे के टुकड़े, 25 पाइप, 20 बंडल वायर, 10 फ्लैश तैयार रखना होगा। फोर्स का पीछा करने के बजाय एंबुश लगाने की बात इस दस्तावेज में कही गई है। नक्सलियों ने लिखा है कि हम यहां के लोगों की समस्या समझने में सफल नहीं हुए हैं। जमीन की ज्यादा दिक्कत नहीं है। बांस और तेंदूपत्ता के दामों पर एरिया कमेटी और डिवीजन कमेटी ने ज्यादा काम नहीं किया है। हमारे नए जोन में तीन राज्य हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र में बांस का अलग-अलग रेट है। स्थानीय कैडर से कहा है कि इस साल सितंबर तक बांस के मामले में एक्शन प्लान तैयार करो। तीनों राज्यों में क्या दाम है, कितना बोनस है यह पता करो। बांस कौन काट रहा है, वन सुरक्षा समिति, पेपर मिल, ठेकेदार या वन विभाग यह पता लगाएं। मध्यप्रदेश के मलाजखंड में तांबा खदानों में 70 फीसदी स्थानीय को रोजगार देने का मुद्दा भी उठाने की बात कही गई है। गोपनीयता जरूरी है, जल्द स्थानीय भाषा सीखें नक्सल दस्तावेज में कहा गया है कि गोपनीयता नहीं रखी जा रही है। कैडर जल्दबाजी कर रहे हैं। कैडर से राजनीति और प्लानिंग पर और बात करने की जरूरत है। कहा है-वाकी-टाकी या फोन पर बात करते हुए हमेशा कोडवर्ड इस्तेमाल करें। इसमें कहा गया है कि हमारे कैडर के लोग छत्तीसगढ़ी और हिंदी सीखने में रूचि नहीं दिखा रहे। ऐसे में जनता से कैसे जुड़ेंगे। भाषा सीखने पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। हमेशा सतर्क रहने को कहा है। लिखा है-कैडर किसी पेड़ के पास होते हैं तो बंदूक पेड़ से टिका देते हैं जबकि उसे हमेशा कंधे पर रखना चाहिए। संतरी को हमेशा बंदूक लोड रखनी चाहिए।
Related News
64x64
दुर्ग । अभी तक आपने मोबाइल की बैटरी में विस्फोट के अनेक मामले सुने होंगे, लेकिन शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर में ई-रिक्शा की बैटरी में धमाके का मामला…
64x64
रायपुर। स्मार्ट सिटी बनने की दौड़ में प्रदेश के दो शहरों ने बाजी मार ली है। मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को स्मार्ट सिटी के तीसरे राउंड के नामों की…
64x64
महासमुंद। महासमुंद जिला मुख्यालय से 53 किमी दूर बागबाहरा ब्लॉक के मोखा में किसान मंथिर सिंह ध्रुव ने गुरुवार सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन इसकी वजह 5-6 लाख…
64x64
रायपुर। अब तक तो आपने यही सुना होगा कि कैंसर वंशानुगत नहीं होता, लेकिन मेडिकल रिसर्च में इसके भी शुगर की तरह वंशानुगत होने की पुष्टि हो चुकी है। प्रदेश…
64x64
जशपुर । पेयजल संकट से जूझ रहे जशपुर में नगरपालिका के अफसरों बीते दो दिनों में खुलकर उजागर हो गई। यहां सुविधा लाज के पास पाइप लाइन फूटने से बीते…
64x64
कांकेर। 21 जून बुधवार को दिन के लगभग 11.20 बजे जिले के अलग-अलग भागों में आसमान पर अनोखा नजारा दिखा। जिसमें सूर्य के चारों तरफ बिल्कुल गोल इंद्रधनुष जैसा घेरा…
64x64
रायपुर। जीएसटी आने से आम लोगों को कुछ चीजों में राहत मिलेगी, लेकिन परिवार के साथ बाहर खान महंगा पड़ने वाला है। होटलों में खाने खाने पर प्रति टेबल 65…
64x64
रायपुर। भारत सरकार की स्टार्टअप कंपनियों में प्रदेश की पहली रजिस्टर्ड 'बड़ा दुकान" कंपनी ने थोक और रिटेल कारोबारियों को बड़ा झटका दिया है। इस कंपनी का डायरेक्टर रजत सरकार…