By: Sabkikhabar
17-06-2017 07:38
यह आम धारणा है और लगभग सही भी है कि सरकारी विभागांे में दलाली, कमीषनखोरी और भ्रष्टाचार इतनी गहरी पैठ कर गया है कि आम लोगों ने उसे नियति मानकर आत्मसात कर लिया है। लेकिन स्थिति तब विचित्र हो जाती है जब कोई कर्मठ और ईमानदार अफसर व्यवस्था की न सिर्फ खामियां उजागर कर दे, बल्कि उसे दुरुस्त करने की मुहिम भी छेड दे। मध्यप्रदेष के जनसंपर्क विभाग में इन दिनों ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। अपर संचालक सुरेष गुप्ता को जैसे ही विज्ञापन शाखा का भी प्रभार मिला, उन्होने तथाकथित पत्र -पत्रिकाओं का रिकार्ड खंगालने की दिषा में पूरे विभाग केा लगा दिया। पड़ताल में पता चला कि इस शाखा में विज्ञापन जारी करने के खेल में नियमों की जमकर अवहेलना की गई और अपात्रों को दिल खोलकर नवाजा गया। जो अखबार दस -दस, बीस-बीस हजार की प्रसार संख्या का दावा कर रहे थे, उनकी प्रिंटिंग प्रेस की पडताल में पता चला कि वहां से जितने भी अखबार मुद्रित हो रहे थे और उनकी जो प्रसार संख्या बताई जा रही थी उतने अखबार उस प्रिटिंग प्रेस में छापना संभव ही नहीं था। इतना ही नहीं, अखबार छापने वाली इन फैक्टरियों की पडताल में यह तथ्य भी उजागर हुआ कि कुछ निष्चित समाचारों के ट्रेसिंग पेपर्स निकालकर अलग-अलग अखबारों में इधर उधर कर लगा दिये जाते थे। इनके फीचर पेज ने भी इस हेराफेरी की कलई उतार दी । इसके अलावा जब मासिक पत्रिकाओं की पड़ताल की गई तो पता चला कि भाई लोग कव्हर पेज के चार रंगीन पेज आधुनिक मषीनो से निकलवाते और अंदर के पेजों में फोटो कापी कराये गये पेज लगा देते। अधिकतम 10 प्रति निकालने की इस कवायद पर हजार रु. भी खर्च नही आता और बदले में 15-20 हजार के विज्ञापन का बिल वसूला जाता। श्री गुप्ता ने ऐसे पत्र -पत्रिकाओं की सूची तैयार करवाई तो आंकड़ा 700 से भी ऊपर जा पहुंचा। इनमें राजधानी से प्रकाषित स्वयंभू चड्डी अखबार भी शामिल था, जिसकी प्रतियां सिर्फ अफसरान और हुक्मरान के यहां ही दिखाई देती हंै। इन सबको ब्लेक लिस्टेड कर विज्ञापन सूची से बाहर करने का साहस दिखाकर श्री गुप्ता ने अपनी कर्मठता और कर्तव्य परायणता का परिचय दिया है। अब ऐसे लोग इस कार्यवाही को जनसंपर्क विभाग की तानाषाही निरुपित कर दुष्प्रचार के अपने पारंपरिक हथियार का इस्तेमाल करने लगंे तो इसे ’’ खिसियानी बिल्ली......’’ वाली कहावत के रुप में देखा जा सकता है। हम अपर संचालक श्री गुप्ता के इस साहसी कदम की प्रषंसा कर बधाई देते है कि उन्होने साबित कर दिया है कि अकेला चना भाड़ भले ही न फोड़ सके, मगर भडभूंजे कि आंख फोड़ने के लिये तो एक ही चना काफी होता है। आमीन
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